posted on : अगस्त 8, 2022 3:20 अपराह्न
कोटद्वार । वनस्पति विज्ञान विभाग में आजादी के अमृत महोत्सव के दो दिवसीय समारोह का प्रारंभ शनिवार को विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मुरलीधर कुशवाहा, समस्त प्राध्यापक और छात्र छात्राओं के सहयोग से संपन्न हुआ। शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर जानकी पंवार के निर्देशन में सरस्वती माता प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। राष्ट्रगान के पश्चात प्राकृतिक संसाधनों के महत्त्व और विभिन्न पादप प्रजातियों के बारे में लाईव प्रजेन्टेशन किया गया।
राष्ट्रीय आन्दोलन में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के प्रथम आन्दोलन चम्पारण में नील की खेती पर करारोपण के विरुद्ध शुरू किया गया और स्वदेशी के लिये चरखा पर कपास की सूत और कपड़ा बुननें पर जोर दिया गया। इस प्रकार वनस्पति प्रजातियों का वैज्ञानिक और आर्थिक महत्व के साथ ऐतिहासिक और राजनीतिक परिदृश्य पर भी चर्चा की गई। स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों ने अलग-अलग समूह बनाकर औषधीय पादप, सजावटी पादप, रेशे प्रदान करने वाले पौधें, फल देने वाले पौधें इत्यादि पर सुन्दर प्रस्तुतिकरण दिया । हानिकारक खर-पतवार का विनिष्टीकरण और पर्यावरण के ज्वलन्त मुद्दों पर चर्चा की गई। प्राचार्या ने अपने संबोधन में अमृत महोत्सव के महत्त्व और हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने के आह्वान के साथ विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिये जानकारी दी ।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष ने स्वरचित कविता “स्वदेश गौरव” में नागरिक कर्त्तव्य बोध को प्रस्तुत किया । इस अवसर पर प्राध्यापक प्रोफेसर श्रीराम कटियार, डा. नीता भट्ट, डा. उर्मिला राणा और नेहा कुकरेती ने अपने सम्बोधन में महत्त्वपूर्ण संदेश दिया। विभाग के सभी प्रयोगशाला सहायक और परिचारकों ने भी अपना योगदान दिया। आजाद भारत में पर्याप्त वनक्षेत्र ,शुद्ध पर्यावरण को बनाये रखने और जैवविविधता के लिये विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण पर यह अमृत महोत्सव एक कार्यशाला के रुप में सम्पन्न की गई।


