posted on : अप्रैल 13, 2022 7:17 अपराह्न
कोटद्वार। प्रदेश सरकार की ओर से राज्य आंदोलनकारियों को दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के संदर्भ में लंबे समय बाद नैनीताल हाई कोर्ट में जाने पर आंदोलनकारियों ने रोष व्यक्त किया है। इस संबध में मोर्चा अध्यक्ष महेंद्र सिंह रावत और उत्तराखंड आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एडवोकेट रमन शाह ने संयुक्त प्रेस वार्ता की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने सन 2018 में ही आरक्षण के विरुद्ध फैसला सुना दिया था जिस पर आंदोलनकारियों ने एक महीने के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। कहा कि राज्य सरकार यदि आंदोलनकारियों के हितों के संबध में सोचती तो 2015 के इस विधेयक को राज्यपाल के पास भेजती या सुप्रीम कोर्ट में आंदोलनकारियों की पैरवी करती। सरकार अपनी लापरवाही को सरकारी अधिवक्ताओं के सर मढ़ रही है जो गलत है। आंदोलनकारी अब अपने आंदोलन को तेज करेंगे। संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए एडवोकेट अनुराग वर्मा व नीरज चौहान को कोर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। चुनाव के समय तो सरकारें आंदोलनकारियों के हितों के संबध में शासनादेश जारी कर देती है। लेकिन उस पर कार्रवाई होती ही नहीं है। जैसा कि सितंबर 2021 में सरकार की ओर से चिन्हीकरण व मृतक आश्रित पेंशन के संबध में शासनादेश जारी किया गया था। लेकिन उस पर ठोस कार्रवाई हुई ही नहीं। जिलाधिकारियों ने चिन्हीकरण को लेकर बैठकें की ही नहीं। कहा कि मोर्चा 2015 से ही आंदोलनकारियों के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग करता आ रहा है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रेस वार्ता में समीम अब्बासी, गुलाब सिंह रावत, राकेश लखेड़ा, वीरेंद्र सिंह रावत और हयात सिंह आदि थे।


