शनिवार, अगस्त 22, 2026
  • Advertise with us
  • Contact Us
  • Donate
  • Ourteam
  • About Us
  • E-Paper
  • Video
liveskgnews
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स
No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स
No Result
View All Result
liveskgnews
22nd अगस्त 2026
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स

देवादिदेव महादेव ने भगवान श्रीराम की मदद के लिए लिया था हनुमान जी के रूप में श्रेष्ठ अवतार

शेयर करें !
posted on : दिसम्बर 13, 2022 12:30 अपराह्न

 

नई दिल्ली : त्रेतायुग में भगवान श्रीराम की सहायता करने और दुष्टों का नाश करने के लिए देवादिदेव महादेव भगवान शिव ने वानर जाति में हनुमान के रूप में अवतार लिया था। हनुमान को भगवान शिव का श्रेष्ठ अवतार कहा जाता है। जब भी श्रीराम-लक्ष्मण पर कोई संकट आया, हनुमानजी ने उसे अपनी बुद्धि व पराक्रम से दूर कर दिया। वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में स्वयं भगवान श्रीराम ने अगस्त्य मुनि से कहा है कि हनुमान के पराक्रम से ही उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की है। आज हम आपको हनुमानजी द्वारा किए गए कुछ ऐसे ही कामों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें करना किसी और के वश में नहीं था-

समुद्र लांघना

माता सीता की खोज करते समय जब हनुमान, अंगद, जामवंत आदि वीर समुद्र तट पर पहुंचे तो 100 योजन विशाल समुद्र को देखकर उनका उत्साह कम हो गया। तब अंगद ने वहां उपस्थित सभी पराक्रमी वानरों से उनके छलांग लगाने की क्षमता के बारे में पूछा। तब किसी वानर ने कहा कि वह 30 योजन तक छलांग लगा सकता है, तो किसी ने कहा कि वह 50 योजन तक छलांग लगा सकता है।
ऋक्षराज जामवंत ने कहा कि वे 90 योजन तक छलांग लगा सकते हैं। सभी की बात सुनकर अंगद ने कहा- मैं 100 योजन तक छलांग लगाकर समुद्र पार तो कर लूंग लेकिन लौट पाऊंगा कि नहीं, इसमें संशय है। तब जामवंत ने हनुमानजी को उनके बल व पराक्रम का स्मरण करवाया और हनुमानजी ने 100 योजन विशाल समुद्र को एक छलांग में ही पार कर लिया।

माता सीता की खोज

समुद्र लांघने के बाद हनुमान जी जब लंका पहुंचे तो लंका के द्वार पर ही लंकिनी नामक राक्षसी से उन्हें रोक लिया। हनुमानजी ने उसे परास्त कर लंका में प्रवेश किया।हनुमानजी ने माता सीता को बहुत खोजा, लेकिन वह कहीं भी दिखाई नहीं दी। फिर भी हनुमानजी के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। मां सीता के न मिलने पर हनुमानजी ने सोचा कहीं रावण ने उनका वध तो नहीं कर दिया। यह सोचकर हनुमानजी को बहुत दु:ख हुआ, लेकिन उनके मन में पुन: उत्साह का संचार हुआ और वे लंका के अन्य स्थानों पर माता सीता की खोज करने लगे। अशोक वाटिका में जब हनुमानजी ने माता सीता को देखा तो वे अति प्रसन्न हुए। इस प्रकार हनुमानजी ने यह कठिन काम भी बहुत ही सहजता से कर दिया।

अक्षयकुमार का वध व लंका दहन

माता सीता की खोज करने के बाद हनुमानजी ने उन्हें भगवान श्रीराम का संदेश सुनाया। इसके बाद हनुमानजी ने अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया। ऐसा हनुमानजी ने इसलिए किया, क्योंकि वे शत्रु की शक्ति का अंदाजा लगा सकें। जब रावण के सैनिक हनुमानजी को पकडऩे आए तो उन्होंने उनका भी वध कर दिया। इस बात की जानकारी जब रावण को लगी तो उसने सबसे पहले जंबुमाली नामक राक्षस को हनुमानजी को पकडऩे के लिए भेजा, हनुमानजी ने उसका वध कर दिया। तब रावण ने अपने पराक्रमी पुत्र अक्षयकुमार को भेजा, हनुमानजी ने उसका वध भी कर दिया। इसके बाद हनुमानजी ने अपना पराक्रम दिखाते हुए लंका में आग लगा दी। पराक्रमी राक्षसों से भरी लंका नगरी में जाकर माता सीता को खोज करना व अनेक राक्षसों का वध करके लंका को जलाने का साहस हनुमानजी ने बड़ी ही सहजता से कर दिया।

विभीषण को अपने पक्ष में करना

श्रीरामचरित मानस के अनुसार जब हनुमानजी लंका में माता सीता की खोज कर रहे थे, तभी उन्होंने किसी के मुख से भगवान श्रीराम का नाम सुना। तब हनुमानजी ने ब्राह्मण का रूप धारण किया और विभीषण के पास जाकर उनका परिचय पूछा। अपना परिचय देने के बाद विभीषण ने हनुमानजी से उनका परिचय पूछा। तब हनुमानजी ने उन्हें सारी बात सच-सच बता दी। रामभक्त हनुमान को देखकर विभीषण बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने पूछा कि क्या राक्षस जाति का होने के बाद भी श्रीराम मुझे अपनी शरण में लेंगे। तब हनुमानजी ने कहा कि भगवान श्रीराम अपने सभी सेवकों से प्रेम करते हैं। जब विभीषण रावण को छोड़कर श्रीराम की शरण में आए तो सुग्रीव, जामवंत आदि ने कहा कि ये रावण का भाई है। इसलिए इस पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उस स्थिति में हनुमानजी ने ही विभीषण का समर्थन किया था। अंत में, विभीषण के परामर्श से ही भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया।

 

राम-लक्ष्मण के लिए पहाड़ लेकर आना

वाल्मीकि रामायण के अनुसार युद्ध के दौरान रावण के पराक्रमी पुत्र इंद्रजीत ने ब्रह्मास्त्र चलाकर कई करोड़ वानरों का वध कर दिया। ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से ही भगवान श्रीराम व लक्ष्मण बेहोश हो गए। तब ऋक्षराज जामवंत ने हनुमानजी से कहा कि तुम शीघ्र ही हिमालय पर्वत जाओ, वहां तुम्हें ऋषभ तथा कैलाश शिखर का दर्शन होगा। इन दोनों के बीच में एक औषधियों का पर्वत दिखाई देगा, तुम उसे ले आओ। उन औषधियों की सुगंध से ही राम-लक्ष्मण व अन्य सभी घायल वानर पुन: स्वस्थ हो जाएंगे। जामवंतजी के कहने पर हनुमानजी तुरंत उस पर्वत को लेने उड़ चले। रास्ते में कई तरह की मुसीबतें आईं, लेकिन अपनी बुद्धि और पराक्रम के बल पर हनुमान उस औषधियों का वह पर्वत समय रहते उठा ले आए। उस पर्वत की औषधियों की सुगंध से ही राम-लक्ष्मण और करोड़ों घायल वानर पुन: स्वस्थ हो गए।

अमर राक्षसों से छुटकारा

जब रावण ने देखा कि श्रीराम सेना उन पर भारी पड़ रही है तो एक ऐसी सेना उतार दी, जिसका कोई वध नहीं कर सकता था। ये थे अमर राक्षस। युद्ध में इन राक्षसों को देखकर श्री राम समेत पूरी सेना चिंतित हो उठे। जब हनुमान जी को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने सभी को चिंता मुक्त करते हुए अमर राक्षसों को अपनी पूंछ में बांध कर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से ऊपर आकाश में फेंकने लगे। ये सभी राक्षस आकाश में अधर में लटके हुए चिल्लाने लगे। इस तरह हनुमान जी ने रावण विजय का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

अनेक राक्षसों का वध

युद्ध में हनुमानजी ने अनेक पराक्रमी राक्षसों का वध किया, इनमें धूम्राक्ष, अकंपन, देवांतक, त्रिशिरा, निकुंभ आदि प्रमुख थे। हनुमानजी और रावण में भी भयंकर युद्ध हुआ था। रामायण के अनुसार हनुमानजी का थप्पड़ खाकर रावण उसी तरह कांप उठा था, जैसे भूकंप आने पर पर्वत हिलने लगते हैं। हनुमानजी के इस पराक्रम को देखकर वहां उपस्थित सभी वानरों में हर्ष छा गया था।

 

https://liveskgnews.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1-1.mp4
https://liveskgnews.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Video-2025-09-15-at-11.50.09-PM.mp4

हाल के पोस्ट

  • पौड़ी गढ़वाल : रांसी स्टेडियम में लगभग 500 खिलाड़ियों ने दिखाई खेल प्रतिभा
  • सीता सर्किट को पर्यटन मानचित्र पर मिलेगी नई पहचान, संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात ने किया स्थलीय निरीक्षण
  • आईटी पार्क क्षेत्र में जलभराव का होगा स्थायी समाधान, सितंबर में पूरा होगा विस्तृत सर्वेक्षण
  • पहाड़ की बेटियों के हुनर को मिला बाजार, श्री तिमली हैंडलूम्स बन रहा महिला सशक्तिकरण की मिसाल
  • नारी निकेतन की संवासिनियों और बालिका निकेतन की बालिकाओं के लिए विशेष हेयर ग्रूमिंग एवं पर्सनल केयर क्लास
  • पौड़ी गढ़वाल में तीन स्तरों पर होगा खेल महाकुंभ, ऑनलाइन पंजीकरण शुरू
  • चीनी के दाम में उबाल: उत्पादन पर मौसम की मार, त्योहारों की बढ़ती मांग और एथेनॉल का दबाव, त्योहार में कड़वी होगी मिठाई 
  • उत्तराखंड का ‘काकोरी कांड’ : कर्णप्रयाग कांड की 84वीं वर्षगांठ पर शहीदों को नमन
  • हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सौरभ गोदियाल ने जन्म दिवस पर वृक्षारोपण एवं स्वैच्छिक रक्तदान कर दिया मानव सेवा का संदेश
  • हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की डॉ. मनीषा निगम राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चयनित
liveskgnews

सेमन्या कण्वघाटी हिन्दी पाक्षिक समाचार पत्र – www.liveskgnews.com

Follow Us

  • Advertise with us
  • Contact Us
  • Donate
  • Ourteam
  • About Us
  • E-Paper
  • Video

© 2017 Maintained By liveskgnews.

No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स

© 2017 Maintained By liveskgnews.