posted on : अगस्त 11, 2022 2:24 अपराह्न
देहरादून : बच्चों ने रक्षाबंधन का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास एवं उमंग से मनाया. सुबह से ही तैयारी कर रही बहनों ने भाइयों के हाथों में राखियां बांधी. भारत में रक्षाबंधन को लेकर पौराणिक और ऐतिहासिक परंपरा रही है. कहा जाता है की असुर देवता संग्राम में इंद्र को उनकी पत्नी इंद्राणी ने अभिमंत्रित रेशम का धागा बांधा था जिसकी शक्ति से वे विजयी हुए. भगवान श्री कृष्ण को द्रौपदी द्वारा उनके घायल उंगली में साड़ी की पट्टी बांधने को भी रक्षाबंधन से जोड़कर देखा जाता है. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में भी रक्षाबंधन को लेकर कई किस्से कहानी विख्यात है. मेवाड़ की रानी कर्मावती पर बहादुर शाह ने जब हमला किया तो उन्होंने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर रक्षा की याचना की. जिसके बाद हुमायूं ने रानी कर्मावती की ओर से युद्ध कर कर्मावती के राज्य की रक्षा की. सिकंदर की पत्नी ने भी हिंदू राजा पुरू को राखी बांधकर अपना भाई बनाया था.
बहनों ने सुबह से उपवास रखकर स्नान और श्रृंगार किया. खुद सज धज कर बहनों ने थाल सजाई. जिसमें राखियों के साथ रोली हल्दी चावल दीपक मिठाई आदि रखा. भाइयों को टीका लगाकर उनकी आरती उतारी गई और उनकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधी गई. भाइयों ने रक्षा का वचन देते हुए बहनों को उपहार प्रदान किए. छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में रक्षाबंधन को लेकर एक सा उत्साह नजर आया. तमाम आधुनिकताओं के बावजूद आज भी भारतीय परंपराओं पर अटूट विश्वास की झलक ऐसे ही पर्व पर नजर आती है. सभी भाई और बहनों को वर्षभर इसकी प्रतीक्षा होती है. भाइयों ने बहनों को सुंदर-सुंदर उपहार भेंट किए. भाई बहन के प्यार, स्नेह और समर्पण के इस त्योहार से घरों में भी माहौल खुशनुमा बन गया. बहनों ने भगवान से प्रार्थना की है कि उनका भाई-बहन का प्यार सदा के लिए बना रहे. बाजारों में भी राखी के त्यौहार की खासी धूम देखी जा रही है.


