कोटद्वार : उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने स्वर्गीय भक्त दर्शन जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किये। भक्तदर्शन जी का जन्म 12 फरवरी, 1912 को पौड़ी जिले की सांबली पट्टी के भौराड़ गांव में हुआ था। उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा गांव में ग्रहण की और डीएवी देहरादून से इंटर कर, स्नातक शांति निकेतन से किया। 1929 के लाहौर अधिवेशन में वह कांग्रेस के स्वयंसेवक बन गए, 1930 के नमक आंदोलन में वह पहली बार जेल गये, फिर 1941 से 1947 तक सत्याग्रह में शामिल हो उनकी जेलयात्राएँ जारी रहीं। इस बीच वह गढ़वाल से प्रकाशित समाचार पत्र गढ़देश और कर्मभूमि का सम्पादन भी करते रहे। 1945 में आजाद हिंद फौज के लिए निर्मित कोष के वह गढ़वाल प्रभारी भी रहे।
आजादी के बाद 1952 में वह गढ़वाल से सांसद निर्वाचित हुये और लगातार चार बार निर्वाचित होते रहे तथा 1963 से 1971 तक केंद्रीय मंत्री रहे, उच्च शिक्षा मंत्री रहते उन्होंने केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना की 1971 में 58 वर्ष की आयु होने पर उन्होंने राजनीति से यह कहकर अपने को अलग कर लिया कि मेरी अधिवर्षता आयु हो चुकी है, अब किसी और को मौका दिया जाय। इंदिरा गांधी जी के लाख समझाने पर भी वह अपने निर्णय पर अडिग रहे। राजनीति से सन्यास के बाद वह कानपुर विवि के कुलपति रहे, उ0प्र0 भाषा संस्थान के अध्यक्ष रहे और खादी ग्रामोद्योग में उपाध्यक्ष भी रहे, इस बीच उन्होंने हिंदी और खादी के प्रचार, प्रसार और संवर्द्धन का कार्य किया।
उन्होंने गढ़वाल की विभूतियाँ, श्रीदेव सुमन स्मृति ग्रन्थ, स्वामी रामतीर्थ, मुकुंदी लाल बैरिस्टर, अमर सिंह रावत और उनके आविष्कार और गढ़वाल मंडल की दिवंगत विभूतियां जैसी पुस्तकों की रचना भी की। 30 अप्रैल, 1991 को देहरादून में किराए के मकान में रहते उनका निधन हो गया।




