कोटद्वार । डॅा. पी.द.ब.ही. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरुवार को “सतत विकास के लिए पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। जिसमें देश-विदेश के विषय विशेषज्ञों द्वारा अपने विचारों को प्रेषित किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. जानकी पंवार द्वारा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के स्वागत द्वारा किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. जानकी पंवार ने अपने स्वागत संदेश के द्वारा उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, उत्तराखंड सरकार, डॉ. बीएस बिष्ट जी उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा विकास बोर्ड उत्तराखंड सरकार, डॉ. कुमकुम रौतेला निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड सरकार, प्रो. एमएसएम रावत सलाहकार रूसा उत्तराखंड शासन सहित समस्त लोगों का स्वागत करते हुए कहा की जैव विविधता संरक्षण हेतु सतत् विकास आज की मांग है। सतत् विकास एक ऐसा विकास है जिसमें वर्तमान की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके तथा आने वाली पीढ़ियां भी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ धन सिंह रावत , उच्च शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि जैव विविधता के क्षेत्र में हमारा राज्य मॉडल प्रदेश है। चिपको आंदोलन में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साथ ही साथ देवभूमि होने के नाते पर्यावरण से हम सभी का निकट का संबंध है।उन्होने प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में फोर जी सेवाओं को शीघ्र लागू करने के संबंध में भी बताया।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. कुमकुम रौतेला ने भी उच्च शिक्षा मंत्री का स्वागत करते हुए जैव विविधता संरक्षण के संबध में अपने विचारो को रखा।ऊर्जा के गैर परम्परागत स्रोतों को अपनाने और पर्यावरण बचाने पर विशेष बल दिया । डॉ. बीएस बिष्ट ने अपने विचारो के माध्यम से बताया कि जहां प्राण है वहां परमात्मा मौजूद है इसलिए हमें किसी को नुक्सान नहीं पहुंचना चाहिए। डॉ. साकेत बडोला ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की प्रासंगिकता को वर्तमान के संदर्भ में अवगत कराया और बताया कि बाघ संरक्षण वर्तमान में ज्वलंत मुद्दा है। डॉ. एमएसएम रावत ने भी जैव विविधता संरक्षण की जरूरत से अवगत कराया। डॉ.राकेश भूटानी ने जल संरक्षण और उसके महत्व को विस्तार से बताया।
डॉ.एरोल करकन ने यूरोपीय देशों की जैव विविधता से हमें क्या सिख मिली है? विषय पर विस्तार से चर्चा की। प्रो. कॉमला संदा ने रासायनिक कीटनाशकों और उनके दुष्परिणामों के विषय में जानकारी दी। इसी क्रम में डॉ. लेंकोंडिया कोलानी, डॉ. आर.के. गुप्ता और अन्य बुद्धिजीवियों ने अपने विचारो को रखा। अंत में अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार की संयोजक डॉ. स्मिता बडोला द्वारा अंतरराष्ट्रीय वेबिनर कि सफलता पर धन्यवाद ज्ञापन में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का हार्दिक आभार व्यक्त किया, उन्होने अपने धन्यवाद ज्ञापन में अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में मौजूद सभी विद्वजनों, सभी प्रतिभागियों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में देश विदेश के 1000 प्रतिभागियों ने सहभागिता की । उन्होने बताया कि आज हमारे महाविद्यालय के लिए यह बड़ा गर्व का विषय है कि विश्व स्तरीय वक्ताओं के विचारों को सुनने के लिए विदेशों के साथ-साथ देश के हर प्रदेश और हर कोने से प्रतिभागी हमारे बीच उपस्थित हुए।
मीडिया प्रभारी डॉ. तनु मित्तल ने बताया कि फीडबैक फॉर्म सभी को प्रेषित किए जाएंगे जिसके भरने के उपरांत सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही साथ बताया कि सभी प्रतिभागियों के शोध प्रपत्र आमंत्रित किए गए हैं, जिनको आईएसबीएन नंबर वाली पुस्तक में प्रकाशित किया जाएगा।इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठतम प्राध्यापक डॉ. डी एम शर्मा, अंतरराष्ट्रीय वेबीनार समिति के सभी सम्मानित सदस्य डॉ. सुरमान आर्य, डॉ. प्रीति रानी, डॉ. सुषमा थलेडी, डॉ. योगिता मौजूद रहे।




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