posted on : मार्च 1, 2022 4:16 अपराह्न
कोटद्वार । महाशिवरात्रि पर कोटद्वार शहर के सभी शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी । भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ भोलेनाथ को जलाभिषेक कर उन्हें बेलपत्र, भांग, दूध, धतूरा, मदार आदि का भोग लगा रही है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव की उपासना का महापर्व महाशिवरात्रि एक अलग महत्व रखता है। शहर के सभी शिवालयों में महाशिवरात्रि की विशेष तैयारियां की गई हैं। श्री सिद्धबली बाबा मंदिर, गोविंद नगर स्थित गीताभवन मंदिर, कालाबढ स्थित बालाजी मंदिर सहित शहर के सभी शिव मंदिरों में साफ सफाई कर विशेष पूजा अर्चना की गई। शिवालयों पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उन्हें किसी प्रकार की समस्या न होने इसके लिए मंदिर प्रशासन, प्रशासन और पुलिस प्रशासन की तरफ से विशेष व्यवस्था की गई । शिव मंदिरों के बाहर भोलेनाथ की पूजा में प्रयोग होने वाले विशेष सामानों बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार आदि बेचने वालों की दुकानें भी सजी रही । वहीं नगर निगम की तरफ से शिव मंदिरों की तरफ जाने वाली सड़कों की साफ-सफाई कर चूने का छिड़काव आदि भी किया गया । श्री सिद्धबली मंदिर के मुख्य पुजारी केके दुदपुडी के अनुसार सागर मंथन के पौराणिक आख्यान में कालकूट नामक विष की उत्पत्ति का वर्णन है। इस विष की ज्वाला से समस्त जगत में त्राहि-त्राहि मच गई थी। भगवान शिव ने भक्तों की प्रार्थना पर उस विष का पान कर संसार को विषमय प्रदूषण से मुक्त किया। जिस दिन समुद्र मंथन से कालकूट विष निकला था, उस दिन को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि शिवरात्रि को शिवलोक से अमृतमयी धारा पृथ्वी लोक पर आती है और प्राणियों का कल्याण करती है।



