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AI के दौर में ट्रांसक्रिप्ट पर सवाल : वांगचुक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त

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posted on : फ़रवरी 17, 2026 5:58 अपराह्न

नई दिल्ली । देश के सर्वोच्च न्यायालय ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की NSA के तहत हिरासत से जुड़े मामले में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए वीडियो ट्रांसक्रिप्ट्स की सटीकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा, “हम AI के दौर में हैं”, ऐसे में अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन में उच्च स्तर की शुद्धता अपेक्षित है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वांगचुक की हिरासत के समर्थन में प्रस्तुत किए गए वीडियो साक्ष्यों से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने अदालत में उनके भाषणों की ट्रांसक्रिप्ट पेश की थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि लगभग 3 मिनट के भाषण की 7–8 मिनट लंबी ट्रांसक्रिप्ट दाखिल की गई है। कोर्ट ने इसे गंभीर विसंगति मानते हुए कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि केंद्र द्वारा पेश ट्रांसक्रिप्ट में ऐसे शब्द जोड़े गए हैं, जो वांगचुक ने कथित तौर पर कहे ही नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपलब्ध है, तब अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन कम से कम 98% तक सटीक होना चाहिए। अदालत ने केंद्र से वास्तविक (Actual) वीडियो रिकॉर्डिंग और उसकी प्रमाणिक ट्रांसक्रिप्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है, तो इससे हिरासत आदेश की वैधता भी प्रभावित हो सकती है।

मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की गई है। उस दिन केंद्र सरकार से संशोधित और प्रमाणिक ट्रांसक्रिप्ट दाखिल करने को कहा गया है। अदालत इस बात की भी जांच करेगी कि प्रस्तुत दस्तावेज हिरासत आदेश के आधार के रूप में कितने ठोस हैं।

यह मामला केवल एक व्यक्ति की हिरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग और साक्ष्यों की शुद्धता के मानकों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से यह स्पष्ट संकेत गया है कि डिजिटल युग में साक्ष्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी और भी अधिक पारदर्शी और सटीक होनी चाहिए। यदि ट्रांसक्रिप्ट में गंभीर त्रुटियां पाई जाती हैं, तो इसका असर NSA के तहत जारी हिरासत आदेशों की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है।

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