- मुख्यमंत्री एवं पशुपालन मंत्री के मार्गदर्शन में पशुपालन से स्वरोजगार को बढ़ावा, थलीसैंण के दीवान सिंह प्रतिमाह कमा रहे 70 हजार रुपये
- 5 हजार पैरेंट स्टॉक की कुक्कुट इकाई के लिए 1.40 करोड़ रुपये स्वीकृत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुटे युवा
पौड़ी। पहाड़ों में स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ग्रामीण युवा नई राह बना रहे हैं। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड थलीसैंण के ग्राम बंगाली निवासी 31 वर्षीय दीवान सिंह ने कुक्कुट पालन को अपनी आजीविका का आधार बनाया है। वर्ष 2020 से इस व्यवसाय से जुड़े दीवान सिंह वर्तमान में प्रतिमाह करीब 70 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। अब उनके व्यवसाय को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी है। उत्तराखंड पशुपालन विभाग की कुक्कुट पालन योजना के अंतर्गत 5 हजार पैरेंट स्टॉक की इकाई स्थापित करने के लिए शासन ने 1.40 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है।
कुक्कुट पालन को बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी
दीवान सिंह ने वर्ष 2020 में कुक्कुट पालन का व्यवसाय शुरू किया था। लगातार प्रयासों के जरिए उन्होंने इसे आय के साधन के रूप में विकसित किया। वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग 70 हजार रुपये है। अब 5 हजार पैरेंट स्टॉक की इकाई स्थापित होने से उन्हें व्यवसाय का विस्तार करने और कुक्कुट पालन को बड़े स्तर पर विकसित करने का अवसर मिलेगा।
सरकारी योजना से मिलेगा कारोबार को विस्तार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के मार्गदर्शन में प्रदेश में पशुपालन आधारित स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में दीवान सिंह की इकाई के लिए शासन स्तर से 1.40 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। विभागीय योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को व्यवसाय शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि जनपद में पशुपालकों को विभागीय योजनाओं की जानकारी देने और स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पशुपालन और कुक्कुट पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने तथा रोजगार के अवसर विकसित करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विभाग का प्रयास है कि पात्र पशुपालकों को योजनाओं का लाभ दिलाकर उनकी आजीविका मजबूत की जाए। उन्होंने कहा कि दीवान सिंह जैसे युवाओं की पहल अन्य लोगों को भी पशुपालन आधारित व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
पहाड़ में ही रोजगार और आय का अवसर
दीवान सिंह की पहल दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण युवा अपने क्षेत्र में ही स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकते हैं। कुक्कुट पालन जैसे व्यवसाय व्यक्तिगत आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने में भी योगदान दे सकते हैं।







