जोशीमठ (चमोली)। सरकार भले की पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं व सड़कों से जोड़ने के भले कितने भी दावे कर ले लेकिन जमीन हकीकत आज भी कई गांवों की ये है कि ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा पाने के लिए कई-कई किलोमीटर पैदल चल कर अपना इलाज करवाने अस्पताल पहुंचते है। पहाड़ में सड़क और स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कितनी गर्भवती महिलाऐं रास्ते में ही दम तोड़ चुकी हैं। यही नहीं गंभीर रूप से बीमार को तो कभी-कभी भगवान भरोसे भी नौबत भी पहाड़ के गांवों की नियती बन चुकी है।
एक ऐसा ही वाकिया बुधवार को सामने आया जब जोशीमठ विकास खंड के ह्यूणा गांव है जो सड़क से तीन से चार किमी की दूरी पर है। गांव को अभी तक सड़क से नहीं जोड़ा गया है और ना ही गांव में स्वास्थ्य सुविधा की कोई व्यवस्था है। ऐसे में बुधवार की सुबह 55 वर्षीय अषाढ़ी देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। गांव में स्वास्थ्य सुविधा न होने व सड़क के अभाव में गांव के कुछ युवाओं ने लकड़ी की पालकी बनाकर महिला को 04 किलोमीटर पैदल चल कर मुख्य सड़क मार्ग तक पहुंचाया जहां से उसे चिकित्सालय लाया गया। लेकिन महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हायर सेंटर श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया गया है।
गांव के स्थानीय युवक राकेश सिंह भंडारी ने बताया कि बुधवार सुबह अचानक महिला की तबीयत खराब हो गई थी जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए गांव के युवकों ने पालकी का निर्माण किया और सड़क मार्ग तक पहुंचाया जिसके बाद एक निजी वाहन से उन्हें विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय पीपलकोटी लाया गया। जहां से उन्हें श्रीनगर के लिए रैफर कर दिया गया है।




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