posted on : अगस्त 26, 2022 6:06 अपराह्न
कोटद्वार । प्रसिद्ध समाज सेवक रहे मुंशी हरि प्रसाद टम्टा को 135 वीं जयंती पर याद किया गया। सिम्भलचौड में स्थित शैलशिल्पी विकास संगठन के कार्यालय में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला।वक्ताओं ने कहा कि उन्हीं के प्रयासों से भूमिहीनों को तीस हजार एकड़ कृषि भूमि दी गई। वक्ताओं ने प्राथमिक व प्रौढ़ पाठशालाओं के निर्माण में उनके योगदान अनुकरणीय रहा है । दलित शोषित समाज के नायक राय बहादुर मुंशी हरि प्रसाद टम्टा ने ना केवल दलित समाज को शिल्पकार नाम दिया बल्कि सेना में शिल्पकारों को प्रतिनिधित्व दिलाने वाले पहले समाज सुधारक थे। उन्होंने जीवन भर समाज में पनप रहे भेदभाव को खत्म करने के लिए संघर्ष किया ।
बताते चलें कि 1927 में मुंशी हरि प्रसाद टम्टा के अथक प्रयासों से शिल्पकार नाम को सरकारी मान्यता मिली। 1924 में मुंशी हरि प्रसाद टम्टा ने उत्तराखंड में शिल्पकारों का वृहद सम्मेलन आयोजित किया। जिसके बाद कुमाऊं शिल्पकार सभा का जन्म हुआ। उन्हीं के प्रयासों से 1930-40 के मध्य में कुमाऊं-गढ़वाल में भूमिहीन शिल्पकारों को ब्रिटिश सरकार ने 30 हजार एकड़ कृषि भूमि वितरित की। उन्होंने शिक्षा की अलख जगाने के लिए शिल्पकार सभा के माध्यम से 150 प्राथमिक और प्रौढ़ पाठशालाओं की स्थापना की। इनके सेवाभाव को देखते हुए अंग्रेजों ने इन्हें 1935 में इन्हें रायबहादुर की उपाधि दी थी।


