जोशीमठ/बद्रीनाथ। पिछले वर्ष 7 फरवरी को माणा क्षेत्र में हुए हृदयविदारक ग्लेशियर हादसे की बरसी से पहले चमोली जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। भारी बर्फबारी और संभावित एवलांच (हिमस्खलन) के खतरों को देखते हुए जोशीमठ के उप जिलाधिकारी (SDM) चंद्रशेखर वशिष्ठ ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों की घोषणा की है। प्रशासन ने सीमा सड़क संगठन (BRO) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में काम कर रहे सभी मजदूरों को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए।
‘जान-माल की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता’
एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ ने पिछले वर्ष की त्रासदी का जिक्र करते हुए बताया कि उस हादसे में 8 लोगों की असामयिक मृत्यु हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे, जिन्हें एक जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बचाया जा सका था। उन्होंने दो टूक कहा कि मानवीय जीवन की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है, इसलिए हाई एल्टीट्यूड क्षेत्रों में पर्यटकों और ट्रैकरों के जाने पर फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। मौसम सामान्य होने तक किसी को भी जोखिम भरे क्षेत्रों में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बदलते मौसम पर विशेषज्ञों की चिंता
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश कपरुंवाण ने प्रशासन की इस अग्रिम तैयारी को सराहनीय बताया है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पहाड़ों में फरवरी के महीने में जिस तरह मौसम का मिजाज बदल रहा है और ग्लेशियर टूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, वह भविष्य के लिए एक गंभीर संकेत है। बदलते पर्यावरणीय चक्र को देखते हुए सुरक्षा के ये व्यापक इंतजाम करना अनिवार्य हो गया है।



