थराली / चमोली (रमेश थपलियाल) : पिछले कुछ वर्षों में किसानों का परंपरागत खेती के प्रति रूझान कम हुआ है अब किसान परंपरागत खेती से हटकर बागवानी की ओर रूख कर रहे है और अच्छी आमदानी भी कमा रहे है। ऐसे ही चमोली जिले के थराली विकास खंड के केरा गांव के हर्षपाल रावत अपने दो भाइयों के साथ मिलकर परंपरागत खेती से हटकर पिछले दो वर्षों से बागवानी कर अच्छी आमदानी जुटा रहे है। कोरोना संक्रमण के दौर में जब पहाड़ों में रिवर्स पलायन शुरू हुआ है यानी कि लोग गांव में लौट रहे हैं, तो हर्षपाल और उनके भाइयों की मुहिम लोगों को प्रेरणा का स्रोत हो सकती है जो अपने रोजगार को छोड़ गांव आ गए हैं।
दो वर्ष पूर्व ही हर्ष पाल ने अपने दो भाइयों के साथ केरा गांव में छह नाली भूमि में सब्जी की खेती शुरू की। काफी मेहनत के बाद उन्होंने खेतों को उत्पादन के लिए तैयार किया और यहां टमाटर की खेती शुरू कर दी। उनकी मेहनत रंग लायी और एक सीजन में उन्होंने टमाटर की खेती से डेढ लाख रूपये की आमदानी की।
हर्षपाल कहते है कि पहले सीजन में की गई मेहनत से जो आमदानी हुई उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। और अब उन्होंने छह नाली से बढ़ा कर तीस नाली भूमि पर विभिन्न प्रकार की बैमोसमी से लेकर मौसमी सब्जियों का उत्पादन शुरू कर दिया है। जैविक रूप से तैयार इनकी सब्जियों की खपत थराली और आसपास के बाजारों में ही हो जाती है। लोगों की काफी मांग है जिससे उनके भाई भी काफी उत्साहित है और दोगुनी मेहनत के साथ काम कर लोगों की मांग के अनुरूप सप्लाई भी कर रहे है।
उन्होंने बताया कि फार्म को इंटीग्रेटेड करते हुए एक और मत्स्य पालन के लिए तालाब तैयार कर रहे हैं तो मुर्गी फाल पालन एवं पशुपालन के लिए गौशाला में भी तैयार की जा रही है। वे कहते है कि पहाड़ में स्वरोजगार की कमी नहीं है बल्कि करने वालों की कमी है। किसी भी कार्य को करने में मेहनत लगती है और मेहनत रंग अवश्य लाती है। वे कहते है कि जो लोग यहां से पलायन कर फिर से गांव आ रहे है उन्हें यहीं रह कर अपना स्वरोजगार शुरू कर देना चाहिए इससे पहाड़ का विकास भी होगा और पलायन भी रूकेगा।




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