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नरेला बुग्याल में मां नंदा को किया गया विदा, लोकजात संपन्न

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posted on : अगस्त 25, 2020 4:33 अपराह्न

कैलाश विदा करने से पहले मां नंदा की पूजा अर्चना कर भेंट अर्पित की गयी

एक साल बाद होगी नंदा देवी की वार्षिक लोकजात

मां नंदा को कैलाश विदा करने के बाद लोकजात संपन्न

गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय की अधिष्टात्री देवी मां की वार्षिक लोकजात यात्रा का अनुष्ठान का समापन हो गया। नंदा सप्तमी को हिमालय में स्थित उच्च बुग्यालो मां नंदा को कैलाश के लिए विदा किया गया।

मंगलवार को मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली सुबह गैरोली पातल से वेदनी बुग्याल पहुंची। जहां पहुचते ही मां नंदा ने पूरे वेदनी कुंड की परिक्रमा की, जिसके बाद मां नंदा की पूजा अर्चना कर भेंट अर्पित की गयी तत्पश्चात मां नंदा को कैलाश को विदा किया गया। नंदा को विदा करते समय वहां मौजूद श्रद्धालुओं की आंखे नम हो गयी क्योंकि अब एक साल बाद ही नंदा लोकजात होगी। वहीं दशोली कुरूड की डोली रामणी से बालपाटा बुग्याल पहुंची। बालपाटा बुग्याल में मंँ नंदा की पूजा अर्चना करनें के बाद मां नंदा को कैलाश के लिए विदा किया गया। दूसरी ओर नंदा सप्तमी के अवसर पर नरेला बुग्याल में बंड की नंदा की छंतोली की पूजा अर्चना और समौण भेंट मां नंदा को कैलाश की ओर विदा किया गया। इस अवसर पर प्रकाश गौड, प्रदीप नेगी सहित अन्य श्रद्धालु भी उपस्थित थे।

ठंड की दस्तक

नंदा को कैलाश विदा करनें के पश्चात डोली और छंतोली वापस लौट आई है। ये मान्यता है कि नंदा की लोकजात सम्पन्न होने के बाद जैसे ही डोली वापस लौटती है वैसे ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ठंड भी शुरू हो जाती है और भेड बकरी पालन करने वाले पालसी लोग भी धीरे-धीरे हिमालय से मैदानी इलाकों की ओर वापस लौटने लग जाते हैं। जबकि बुग्यालो में मौजूद हरी घास भी पीली होना शुरू हो जाती है।

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