नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता Manish Sisodia ने दिल्ली हाईकोर्ट की जज Justice Swarn Kanta Sharma को एक चिट्ठी लिखकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। इससे पहले पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal भी इसी तरह की चिट्ठी लिख चुके हैं।
सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में साफ कहा कि आबकारी नीति मामले में उनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं होगा। उन्होंने अदालत पर भरोसा न जताते हुए लिखा कि “मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है। मेरे पास अब सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में उन्होंने सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta का भी उल्लेख करते हुए न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
केजरीवाल भी जता चुके हैं अविश्वास
इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर सुनवाई पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही, इसलिए उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग को अपनाने का फैसला किया है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार सुरक्षित रखने की बात भी कही थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला दिल्ली की आबकारी नीति 2021-22 से जुड़ा है, जिसमें अनियमितताओं और कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इस केस की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) कर रही हैं।
हालांकि, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पहले इस मामले में सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले को CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जहां फिलहाल सुनवाई चल रही है।
बढ़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद
केजरीवाल और सिसोदिया द्वारा न्यायाधीश पर अविश्वास जताने और सत्याग्रह की बात कहने से मामला अब कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है। विपक्षी दल जहां इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बता रहे हैं, वहीं AAP इसे न्याय की मांग का हिस्सा बता रही है।





