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हर दिन अपने मस्तिष्क को रखें क्रियाशील : लंबी उम्र तक तेज़ दिमाग पाने के अचूक तरीके

लेखक : नरेन्द्र सिंह चौधरी, भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. इनके द्वारा वन एवं वन्यजीव के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किये हैं.

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posted on : जुलाई 22, 2025 4:43 अपराह्न

देहरादून :  हर दिन अपने मस्तिष्क को क्रियाशील रखें: पुस्तक पढ़ना, क्रॉसवर्ड, भाषा संबंधी ऐप्स, अपनी रुचि का काम – कोई भी चीज़ जो आपको नई जानकारी से जूझने पर मजबूर करती है, मस्तिष्क को नए कनेक्शन बनाने के लिए प्रेरित करती है। तंत्रिका “लचीलापन” मांसपेशियों की तरह है: इसे काम में लगाएँ, या इसे खो दें!

  • नियमित व्यायाम से अपने शरीर को गतिशील बनाएँ: तीस मिनट की तेज़ सैर, ऑक्सीजन युक्त रक्त को सोचने वाले केंद्रों तक पहुँचाती है और नए न्यूरॉन्स के विकास को बढ़ावा देती है। नित्य व्यायाम रक्तचाप और तनाव, जो मस्तिष्क को बूढ़ा करने वाले दो बड़े कारक हैं, को भी कम करता है।
  • भूमध्यसागरीय शैली का आहार लें: अपनी थाली में पत्तेदार सब्ज़ियाँ, फल, मेवे, जैतून का तेल, मछली और बीन्स रखें। यह तरीका सूजन को कम करता है और मस्तिष्क को आवश्यक ओमेगा-3, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करता है।
  • रक्तचाप को हेल्दी जोन में रखें: मध्य आयु में उच्च रक्तचाप बाद में मनोभ्रंश के जोखिम को लगभग दोगुना कर देता है। दुबले-पतले रहें, नमक और शराब का सेवन कम करें, तनाव को नियंत्रित करें, और अगर जीवनशैली में सुधार से लक्ष्य पूरा न हो रहा हो तो आवश्यक दवाएँ लें।
  • रक्त शर्करा नियंत्रित करें: मधुमेह उन छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है जो स्मृति परिपथों को पोषण प्रदान करती हैं। संतुलित भोजन, दैनिक गतिविधि और वज़न नियंत्रण ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखते हैं; जब ये पर्याप्त न हों तो दवाएँ काम आती हैं।
  • कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार करें: उच्च एलडीएल कोलेस्ट्रॉल रक्त प्रवाह को धीमा कर देता है और मस्तिष्क में प्लाक के निर्माण को तेज़ कर देता है। यही तिकड़ी – व्यायाम, संतुलित आहार, तंबाकू का सेवन न करना – इस अनुपात को आपके पक्ष में कर देती है; स्टैटिन एक अतिरिक्त उपाय है।
  • कम खुराक वाली एस्पिरिन के बारे में अपने डॉक्टर से पूछें: कुछ अध्ययनों के अनुसार, रोज़ाना शिशु एस्पिरिन लेने से संवहनी मनोभ्रंश की संभावना कम हो सकती है, संभवतः सूक्ष्म स्ट्रोक को रोककर। यह हर किसी के लिए नहीं है, इसलिए गोली लेने से पहले जोखिमों पर डॉक्टर से चर्चा करें।
  • हर रूप में तंबाकू से बचें: निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है और ऑक्सीडेटिव तनाव को बढ़ाता है। इसे छोड़ना दिल और दिमाग दोनों के लिए जीवनशैली में सबसे शक्तिशाली बदलाव लाता है।
  • शराब कम पिएँ: दिन में दो से ज़्यादा ड्रिंक्स लेने से समय के साथ दिमाग के कुछ हिस्से सिकुड़ जाते हैं। अगर आप पीते हैं, तो कृपया मात्रा कम रखें और नियमित रूप से शराब-मुक्त दिन निर्धारित करें।
  • अपनी भावनाओं और नींद का ध्यान रखें: चिंता, अवसाद, थकावट और पुरानी अनिद्रा एकाग्रता और याददाश्त को कमज़ोर कर देती है। थेरेपी, माइंडफुलनेस और लगातार सात से नौ घंटे की नींद लेने से हमारा शरीर की मरम्मत का कार्य सुगम होता है।
  • अपने सिर को चोट से बचाएँ: हल्की-फुल्की चोटें भी – साइकिल से गिरना, खेल में धक्के लगना, गिरना – लंबे समय तक संज्ञानात्मक गिरावट की संभावना को बढ़ा देती हैं। हेलमेट, गिरने से बचाने वाले घर के फर्श, विशेषकर बाथरूम के फर्श और कार में सीट-बेल्ट किसी भी सप्लीमेंट से बेहतर तरीके से मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा करने में सहायक होतें हैं।
  • सामाजिक नेटवर्क बनाएँ और उन्हें पोषित करें: सुदृढ मित्रता, प्यार और सामुदायिक संबंध तनाव हार्मोन को कम करते हैं और संज्ञानात्मक बैटरी को चार्ज रखते हैं। साप्ताहिक मुलाकातें, स्वयंसेवा, गेसन, नृत्य, फोटोग्राफी, बर्ड वाचिंग जैसी प्रकृति-हॉबी, हमारे मस्तिष्क को स्वस्थ रखते हैं।

नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं
तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशाँ हो गईं…

~ मिर्ज़ा ग़ालिब

  • ‘विश्व मस्तिष्क दिवस’ की शुभकामनाएँ!!
  • लेखक : नरेन्द्र सिंह चौधरी, भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. इनके द्वारा वन एवं वन्यजीव के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किये हैं.

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