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“डबल वोटर” पर सख्ती : उत्तराखंड पंचायत चुनावों में 1000 से अधिक जनप्रतिनिधियों पर खतरा, न्यायालय के फैसलों से बढ़ी कार्रवाई की रफ्तार

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posted on : अप्रैल 29, 2026 7:18 अपराह्न

देहरादून : उत्तरांचल प्रेस क्लब, देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में “दोहरी मतदाता सूची” (डबल वोटर) के गंभीर मुद्दे को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे गए। पत्रकारों को संबोधित करते हुए डॉ. शक्ति सिंह बर्त्वाल ने कहा कि इस विषय पर शुरू की गई कानूनी लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में धारी (नैनीताल) की ग्राम पंचायत भदरेठ एवं चम्पावत की शक्तिपुरबुंगा जिला पंचायत सीट पर आए न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून सर्वोपरि है। नैनीताल के धारी तहसील में एसडीएम अंशुल भट्ट की अदालत ने ग्राम पंचायत भदरेठ की प्रधान आशा मटियाली का निर्वाचन रद्द कर दिया, क्योंकि उनका नाम दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में दर्ज पाया गया। न्यायालय ने दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी निर्मल सिंह को प्रधान घोषित करने का आदेश दिया। इसी प्रकार, चम्पावत में जिला जज अनुज कुमार संगल की अदालत ने जिला पंचायत सदस्य कृष्णानंद जोशी का चुनाव शून्य घोषित कर दिया। जांच में पाया गया कि उनका नाम पल्सों ग्राम पंचायत और चम्पावत पालिका के नागनाथ वार्ड, दोनों मतदाता सूचियों में दर्ज था।

डॉ. बर्त्वाल ने कहा कि ये दोनों फैसले इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि आने वाले कुछ महीनों में लगभग 1000 से अधिक ऐसे विजेता प्रत्याशी अयोग्य घोषित हो सकते हैं, जिन्होंने एक से अधिक स्थानों पर अपना नाम दर्ज कर चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति राज्य निर्वाचन आयोग की गंभीर लापरवाही का परिणाम है, क्योंकि बार-बार अवगत कराने के बावजूद ऐसे अपात्र प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से नहीं रोका गया।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम, 2016 (संशोधित 2019) के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक से अधिक मतदाता सूची में नामांकित नहीं हो सकता। इसके बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा हाईकोर्ट एवं सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी कर ऐसे प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई, जिनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज था।

डॉ. बर्त्वाल ने बताया कि माननीय हाईकोर्ट के 11 जुलाई के ऐतिहासिक फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपनी मुहर लगा दी है और स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी संस्था वैधानिक प्रावधानों के विपरीत निर्णय नहीं ले सकती। उन्होंने इसे संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

वर्तमान में राज्य की विभिन्न जिला अदालतों में दोहरी मतदाता सूची से संबंधित लगभग 1200 चुनावी याचिकाएं लंबित हैं। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यदि इन मामलों का त्वरित निस्तारण नहीं हुआ, तो लोकतंत्र की निष्पक्षता प्रभावित होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पुनः माननीय हाईकोर्ट की शरण में जा रहे हैं, ताकि 11 जुलाई के आदेश को प्रभावी रूप से लागू कराया जा सके।

डॉ. बर्त्वाल ने कहा कि यह सत्य की जीत है, लोकतंत्र की जीत है और पंचायती राज अधिनियम की जीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि चुनावी सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक जनहित का प्रयास है। उन्होंने अपने अधिवक्ता अभिजय सिंह नेगी एवं उनकी पूरी टीम को भी बधाई दी, जिन्होंने इस पूरे प्रकरण में अथक परिश्रम कर न्याय का मार्ग प्रशस्त किया।

पत्रकार वार्ता के दौरान आम जनता से भी अपील की गई कि यदि किसी व्यक्ति के पास ऐसे किसी प्रत्याशी की जानकारी है, जिसका नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में दर्ज है, तो वे नोटराइज शपथ पत्र के साथ अपनी शिकायत संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) या रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें। यदि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है, तो राज्य निर्वाचन आयोग की ईमेल secelectionuk@gmail.com या टोल फ्री नंबर 1800-180-4280 पर संपर्क किया जा सकता है। साथ ही, डॉ. शक्ति सिंह बर्त्वाल द्वारा जारी ईमेल आईडी sbartwal503@gmail.com पर भी शिकायतें और दस्तावेज भेजे जा सकते हैं, ताकि उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

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सेमन्या कण्वघाटी हिन्दी पाक्षिक समाचार पत्र – www.liveskgnews.com

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