बेंगलुरु : दक्षिण भारत की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी कॉन्फिडेंट ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. सी.जे. रॉय ने शुक्रवार को बेंगलुरु के लैंगफोर्ड टाउन स्थित अपने ऑफिस में आयकर विभाग की चल रही छापेमारी के बीच खुद को लाइसेंसी पिस्तौल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना उस दौरान हुई जब वे पूछताछ के दौरान मां से बात करने के बहाने एडजॉइनिंग रूम में गए और वहां गोली चला दी। उन्हें तुरंत नारायणा हॉस्पिटल (एचएसआर लेआउट) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
आयकर विभाग की टीम (मुख्य रूप से कोच्चि, केरल से) 28 जनवरी से कंपनी के ऑफिस में छापे मार रही थी। यह पिछले महीने की एक बड़ी छापेमारी का फॉलो-अप था। रॉय गुरुवार को विभाग को बयान दे चुके थे। पुलिस ने इसे प्रारंभिक रूप से आत्महत्या माना है, लेकिन फॉरेंसिक जांच, पोस्टमॉर्टम और CCTV/सबूतों की पड़ताल जारी है। कुछ जगहों पर CCTV काम नहीं कर रहा था, जिससे जांच जटिल हुई है।
परिवार ने आयकर अधिकारियों पर “अत्यधिक दबाव” और “हरासमेंट” का आरोप लगाया है। भाई सी.जे. बाबू ने कहा, “उनके पास कोई लोन, धमकी या अन्य समस्या नहीं थी – सिर्फ आयकर का मामला था।” पत्नी लीना रॉय और बेटे रोहित दुबई से पहुंचे हैं। कर्नाटक सरकार ने उच्च-स्तरीय जांच का आदेश दिया है। कंपनी ने भी शिकायत दर्ज की है।
कॉन्फिडेंट ग्रुप एक डेब्ट-फ्री रियल एस्टेट डेवलपर है, जिसके दक्षिण भारत में 65+ प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं। कंपनी दुबई में भी सक्रिय है और शिक्षा, हॉस्पिटैलिटी तथा मलयालम फिल्म प्रोडक्शन (जैसे मोहनलाल की ‘कैसानोवा’) में शामिल रही है। रॉय “जीरो-डेब्ट” मॉडल के लिए मशहूर थे – उन्होंने बिना लोन के कम उम्र में प्राइवेट जेट खरीदा था।
लग्जरी जीवनशैली और संपत्ति: रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति ₹8000 से ₹9000 करोड़ (कुछ में $१ बिलियन से ज्यादा) आंकी गई है। उनके पास गल्फस्ट्रीम G650 प्राइवेट जेट, हेलीकॉप्टर और 2000 से अधिक लग्जरी कारों का कलेक्शन था – जिसमें 12 रोल्स-रॉयस (एक फैंटम VIII), बुगाटी वेरॉन, लैम्बॉर्गिनी, पोर्शे, बेंटले, मर्सिडीज-मेबैक आदि शामिल हैं। उनकी कारों की इंश्योरेंस ही करोड़ों में थी। दुबई, मुंबई और लॉस एंजिल्स में लग्जरी घर और आर्ट कलेक्शन भी थे।
यह घटना 2019 में कैफे कॉफी डे के वी.जी. सिद्धार्थ की आत्महत्या से मिलती-जुलती है, जब वे भी टैक्स जांच के दबाव में थे। बिजनेस जगत में मानसिक स्वास्थ्य, जांच एजेंसियों के तरीके और कॉर्पोरेट तनाव पर बहस छिड़ गई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर आएगी।



