गोपेश्वर/थराली/पोखरी (चमोली)। चमोली जिले में अधिकांश विकास खंडों में ग्राम प्रधानों ने सोमवार को ग्राम प्रधानों के साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ई संवाद का कहीं पूर्ण रूप से तो कहीं आंशिक रूप से बहिष्कार किया। प्रधानों का कहना है कि सरकार ग्राम पंचायतों को कमजोर बनाने का कार्य कर रही है।
सोमवार को उत्तराखंड के सीएम ने प्रधानों के साथ ई संवाद कार्यक्रम रखा था। जिसका की चमोली जिले के पोखरी, जोशीमठ, थराली, नारायणबगड, गैरसैण, कर्णप्रयाग, देवाल, दशोली व घाट विकास खंडों में कहीं पूर्ण रूप से तो कहीं आंशिक रूप से बहिष्कार किया गया। प्रधान संगठन जोशीमठ के ब्लाॅक अध्यक्ष अनूप नेगी, पोखरी के धीरेंद्र सिंह राणा, थराली के डाॅ. जगमोहन सिंह रावत का कहना है कि यह सरकार ग्राम पंचायतों को कमजोर करने पर तुली है। ग्राम प्रधानों के सारे अधिकार कम कर नौकरशाही को बढ़ावा दे रही है। मनरेगा में टेंडर प्रक्रिया कर अपने चेहते दुकानदारों को सामग्री सप्लाई का काम देना चाह रही है। इस लिए प्रधानों ने इसका बहिष्कार किया है। साथ ही उनकी यह भी मांग है कि मनरेगा में कार्य दिवस तीन सौ दिन किया जाए, ग्राम पंचायतों का सोशल ऑडिल कर्मचारियों से ही करवाया जाए न की संस्थाओं से, प्रधानों को 15 हजार रुपया मानदेय व पांच हजार रुपये की पेंशन दी जाए जिसे लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने का समय भी मांगा था लेकिन सीएम ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया।
वहीं दशोली के ब्लाॅक अध्यक्ष नैन सिंह कुंवर का कहना है कि एक ओर प्रधानों पर प्रवासियों के लिए रोजगार की व्यवस्था करने का दबाव बनाया जा रहा है वहीं प्रधानमंत्री की जल जीवन मिशन को ठेके पर दिया जा रहा है। जबकि पूर्व में गांवों में स्वजल के माध्यम से पेयजल से संबंधित जो भी कार्य होते थे उन्हें प्रधान ही संचालित करते थे। यदि जल जीवन मिशन का कार्य ग्राम पंचायतों को मिलता तो प्रवासियों को रोजगार की व्यवस्था हो सकती थी। कहा कि दशोली ब्लाॅक में ई संवाद में कम ही प्रधान पहुंचे थे जो आये थे वह सीएम की ग्राम पंचायतों को लेकर क्या योजना है उसके बारे में जानकारी हासिल करना था लेकिन नेटवर्क ठीक न होने कारण सही ढंग से संवाद न हो सका।




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