कोटद्वार । समाजसेवी कमलेश कोटनाला ने शनिवार को उपजिलाधिकारी के माध्यम से निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म इकाई को ज्ञापन प्रेषित किया ।
ज्ञापन के माध्यम से बताया कि वर्तमान समय में मार्च से जून तक रीवर ट्रेनिंग के तहत खोह और सुखरों व सिगड्डी स्रोत में उपखनिज 1.5 मीटर चुगान की अनुमति दी गई थी जिसका ई रमन्ना बिना किसी तोल के काटा जा रहा है । जबकि इनका समय भी पूरा होने वाला है यहां तक कि खोह और सुखरो नदी में आज तक कोई भी धर्म काटा नहीं है । जिससे विभाग व प्रशासन की लापरवाही सामने आती है और वर्तमान समय में पंद्रह से पच्चीस मीटर नदी गहरी खोदी जा चुकी है ।
वहीं उन्होंने बताया कि खनिज भंडारणों की अनुमति नदी तल से मैदानी क्षेत्र में तीन सौ मीटर की दूरी होनी चाहिए । यह उत्तराखंड नियमावली 2017 में प्रदर्शित है । वर्तमान में जितने भी भंडारण स्वीकृत किए गए हैं उनमें किसी में भी तीन सौ मीटर की दूरी नहीं है और इस मानक की अनदेखी विभाग के द्वारा की गई है । इन उपखनिज भंडारणो के कारण ही मालन नदी और सुखरो नदी में अवैध भंडारण जोरों पर चल रहा है ।
उन्होंने निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म इकाई से मांग की कि नदी तल से तीन सौ मीटर की दूरी की जांच पुन: की जाए तथा पूर्व में जिन अधिकारियों के द्वारा यह जांच की गई है अगर उसमें कोई त्रुटि पाई जाती है तो उन संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध बर्खास्त करने की कार्रवाई भी त्वरित की जाए तथा उपरोक्त मानकों की अनदेखी वाले भंडारों को तुरंत निरस्त किया जाए । भविष्य में भी उत्तराखंड सरकार के मानक पूर्ण न होने पर आवेदन निरस्त कर दिए जाएं ।वहीं धर्म कांटा न होने के संबंध में राज्य हित में समझकर त्वरित कड़ी कार्रवाई पट्टा संचालकों के विरुद्ध की जाए ।




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