posted on : अगस्त 29, 2022 8:02 अपराह्न
कोटद्वार । राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सेमिनार का आयोजन किया । जिसका विषय “कंटेंपरेरी इंग्लिश लिटरेचर” था । सोमवार को सेमिनार में एमए सेकंड सेमेस्टर और एमए फोर्थ सेमेस्टर अंग्रेजी के सभी शोधार्थी विद्यार्थियों ने अपने-अपने लघु शोध पर पीपीटी प्रेजेंटेशन किया तथा महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने भी अपने-अपने शोध पत्रों का पीपीटी प्रेजेंटेशन किया। शोधार्थी विद्यार्थियों द्वारा अंग्रेजी के विभिन्न लेखकों उपन्यास कारों के लेखन के अलग-अलग विधाओं एवम विधियों पर गहरा शोध कर उनको प्रस्तुत किया ।
सेमिनार की अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर जानकी पवार ने लघु शोध एवं शोध कार्य के महत्व पर अपने विचार विस्तार से व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के उत्थान एवं राष्ट्र के विकास के लिए शोध कार्य अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं जैसे की नई शिक्षा नीति में व्यवहारिक एवं रोजगार परक शिक्षण पद्धति पर जोर दिया गया है गया है जिसमें विद्यार्थियों का सर्वाधिक योगदान होता है। छात्र छात्राओं को विद्यार्थी जीवन से ही लक्ष्य निर्धारित करते हुए कठोर परिश्रम के साथ अपनी मंजिल को प्राप्त करने का ईमानदार प्रयास प्रयास निरंतर करने की नितांत आवश्यकता है तभी शोध कार्यों एवं शिक्षा के महत्व को सही सही अर्थों में सार्थक किया जा सकता है । जिससे राष्ट्र की सामाजिक आर्थिक एवं पर्यावरणविद् चौमुखी विकास को नई दिशा मिल सके तथा राष्ट्र की गरीबी , बेरोजगारी, सामाजिक भेदभाव को न्यून किया किया जा सके तथा विकसित राष्ट्र की परिकल्पना को साकार किया जा सके ।

सेमिनार की संयोजक अंग्रेजी विभाग प्रभारी डॉ वंदना चौहान ने सेमिनार में उपस्थित शोधार्थी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि नए युग की नई चुनौतियां एवं उनका समाधान विद्यार्थियों के शोध अध्ययन के फल स्वरुप ही किया जा सकता है । डॉ वंदना चौहान ने कहा कि समकालीन युग साइबर युग है जिसकी चुनौतियों के लिए विद्यार्थियों को कंप्यूटर ज्ञान होना अति आवश्यक है जिससे वह ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में आधुनिक जगत में दुनिया से जुड़ते हुए अपने प्रगति पथ पर अग्रसर हो सकते हैं डॉक्टर वंदना चौहान ने रिसर्च मेथाडोलॉजी पर शोध पत्र को पीपीपी द्वारा प्रस्तुतीकरण कर विद्यार्थियों को शोध की विभिन्न विधियों एवं प्रक्रियाओं से अवगत कराते हुए एमएलए हैंड बुक स्टाइल एडिशन आठ नियमों को विस्तार पूर्वक समझाया ।
सेमिनार की सह संयोजिका डॉक्टर मानसी वत्स ने समकालीन अंग्रेजी साहित्य एवं नारीवाद पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए पूर्व एवं पश्चात उपनिवेशवाद पर विस्तार से महिलाओं की स्थिति की व्याख्या की । सेमिनार के रिसोर्स पर्सन डॉ किशोर सिंह चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल विभाग ने सेमिनार को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों को अपने अपने विषय में व्यवहारिक शोध एवं रचना तथा समसामयिक परिस्थितियों पर लेख लिखने के लिए प्रेरित किया तथा विद्यार्थियों से आग्रह किया कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करते हुए अपने लक्ष्य की प्राप्ति के उद्देश्य के लिए अपनी रुचि अनुसार लेखन कार्य करना अति आवश्यक है जिसके माध्यम से नई संकल्पना परिकल्पना की उत्पत्ति हो सके तथा समाज के सतत एवं व्यवहारिक विकास में नई दिशा मिल सके । स्नातकोत्तर कक्षाओं के सभी छात्र छात्राओं को नेट जेआरएफ की परीक्षाओं की तैयारी करते रहना चाहिए।
डॉ अनुज कुमार शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर , रसायन विभाग ने शोधार्थी छात्रों को संबोधित करते हुए शोध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इस दिशा में और अधिका कार्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला । सेमिनार में उपस्थित डॉ ऋचा जैन, असिस्टेंट प्रोफेसर, वाणिज्य ने शोध कार्यों से व्यापार एवं औद्योगिक जगत के विकास की संभावनाओं पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया । सेमिनार में उपस्थित डॉक्टर अमित कुमार गौर , (असिस्टेंट प्रोफेसर, अंग्रेजी) , डॉक्टर संत कुमार, (असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान ) डॉ. सुनीता नेगी (कोऑर्डिनेटर बायोटेक), डा. चंद्रप्रभा भारती (विभाग प्रभारी संगीत विभाग )एवं डॉक्टर पूनम गैरोला(असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान ) ने अपने विचार व्यक्त किए।


