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मुख्यमंत्री धामी ने मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में दिए प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश, कहा- पूर्व तैयारी और आधुनिक तकनीक से घटेगा आपदा जोखिम

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posted on : जुलाई 2, 2026 4:13 अपराह्न

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईटी पार्क, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे आपदा संभावित राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर विशेष ध्यान देने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन तंत्र की वास्तविक क्षमता, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव व्यवस्था का व्यापक परीक्षण है। उन्होंने निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन को केवल राहत और बचाव तक सीमित न रखकर जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी और तकनीक आधारित प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए।

एआई, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का होगा अधिक उपयोग

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ा रही है। इससे संभावित आपदाओं का समय रहते सटीक आकलन कर जन-धन की हानि को कम किया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव सुनिश्चित करने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को और अधिक सशक्त बनाया गया है तथा दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण को बताया आपदा जोखिम कम करने का प्रभावी उपाय

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण, ग्लेशियर अध्ययन, पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण ही आपदा जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

72 घंटे में मांगी समीक्षा रिपोर्ट

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान सामने आई कमियों और अनुभवों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाए तथा राज्य के सभी 13 जनपद 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) को उपलब्ध कराएं। साथ ही आम लोगों को आपदा सुरक्षा उपायों, आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों और प्राथमिक सावधानियों की जानकारी देने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।

राज्य एवं जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का किया विमोचन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन योजना (SDMP) और राज्य के सभी 13 जिलों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं (DDMP) का भी विमोचन किया। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी, राहत, बचाव, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों में विभिन्न विभागों की भूमिका और समन्वय को स्पष्ट करेंगी तथा आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन को प्रभावी और सुनियोजित तरीके से कार्य करने में मदद करेंगी।

आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में सीबीआरएनई (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक) आपदाओं से निपटने वाले उपकरण, डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन और सोनार सिस्टम सहित कई अत्याधुनिक उपकरण प्रदर्शित किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा जोखिम को न्यूनतम करना और उत्तराखंड को तकनीक-सक्षम तथा जनभागीदारी आधारित आपदा प्रबंधन का देश का अग्रणी मॉडल बनाना है।

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