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उत्तराखंड : गैस पाइप लाइन बनी सीवर जाम की वजह, जल संस्थान ने गेल गैस को थमाया 23.48 लाख का नोटिस

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posted on : जून 17, 2026 9:02 पूर्वाह्न

देहरादून। हरिद्वार रोड स्थित सारथी विहार और सरस्वती विहार क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से सीवर ओवरफ्लो की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर के साथ बड़ा खुलासा सामने आया है। उत्तराखंड जल संस्थान की जांच में पता चला है कि क्षेत्र में बार-बार सीवर जाम होने और सड़कों पर गंदा पानी बहने के पीछे गेल गैस लिमिटेड द्वारा बिछाई गई गैस पाइप लाइन प्रमुख कारण है।

जल संस्थान ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गेल गैस लिमिटेड को करीब 23.48 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति वसूली का नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

जांच में सामने आई तकनीकी खामी

उत्तराखंड जल संस्थान, रायपुर के अधिशासी अभियंता सतीश चंद्र नौटियाल द्वारा जारी नोटिस के अनुसार वर्ष 2022 में सरस्वती विहार क्षेत्र में गेल गैस लिमिटेड ने गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया था। जांच के दौरान पाया गया कि गैस पाइप लाइन मुख्य सीवर लाइन और मैनहोल के बीच से निकाली गई, जिससे सीवर नेटवर्क बाधित हो गया।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार पाइप लाइन बिछाने के दौरान सीवर लाइन को क्षति पहुंची और इसके बाद से सीवर का प्रवाह लगातार प्रभावित होता रहा। परिणामस्वरूप मुख्य सीवर लाइन बार-बार अवरुद्ध होने लगी और गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा।

चार वर्षों से परेशान हैं स्थानीय लोग

क्षेत्र के निवासी लंबे समय से सीवर ओवरफ्लो, जलभराव और दुर्गंध की समस्या से जूझ रहे हैं। हरिद्वार रोड के व्यस्त मार्ग और आसपास की कॉलोनियों में सीवर का गंदा पानी बहने से लोगों को दैनिक जीवन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़कों पर गंदगी और बदबू के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है। वहीं निवासियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बना हुआ है। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जब जलभराव के साथ सीवर का पानी घरों और गलियों तक पहुंच जाता है।

अस्थायी उपायों से नहीं निकला समाधान

जल संस्थान का कहना है कि समस्या को दूर करने के लिए पिछले चार वर्षों में कई बार जेटिंग मशीन, सक्शन मशीन और श्रमिकों की मदद से सीवर लाइन की सफाई कराई गई। हालांकि तकनीकी बाधा बने रहने के कारण यह प्रयास केवल अस्थायी राहत तक सीमित रहे।

अधिकारियों के अनुसार जब भी सीवर लाइन की सफाई की जाती थी, कुछ समय बाद समस्या दोबारा उत्पन्न हो जाती थी। इसके बाद विभाग ने पूरी लाइन की तकनीकी जांच कराई, जिसमें वास्तविक कारण सामने आया।

50 मीटर सीवर मरम्मत का दावा भी सवालों के घेरे में

जल संस्थान ने अपने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि गेल गैस की ओर से विभाग को बताया गया था कि प्रभावित क्षेत्र में लगभग 50 मीटर सीवर लाइन का पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य कराया जाएगा। लेकिन विभागीय निरीक्षण और उपलब्ध वीडियोग्राफी के विश्लेषण में इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी।

अधिकारियों का कहना है कि मौके पर किए गए निरीक्षण में ऐसी कोई स्थिति नहीं मिली, जिससे यह साबित हो सके कि व्यापक स्तर पर सीवर लाइन का पुनर्निर्माण किया गया है। यही कारण है कि विभाग ने कंपनी के दावों पर आपत्ति जताई है।

विभाग ने मांगा नुकसान का हर्जाना

जल संस्थान का कहना है कि बार-बार सफाई, मशीनरी के उपयोग, श्रम व्यय और सीवर नेटवर्क को हुए नुकसान के कारण विभाग को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। इसी आधार पर लगभग 23.48 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया गया है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार यदि कंपनी की ओर से संतोषजनक जवाब या समाधान प्रस्तुत नहीं किया गया तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्थायी समाधान की उम्मीद

मामले के उजागर होने के बाद क्षेत्रीय निवासियों को उम्मीद है कि वर्षों पुरानी सीवर समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा। लोगों का कहना है कि यदि तकनीकी बाधा को दूर कर दिया जाए तो क्षेत्र में सीवर ओवरफ्लो और गंदे पानी की समस्या समाप्त हो सकती है।

फिलहाल पूरे मामले पर निगाहें गेल गैस लिमिटेड की प्रतिक्रिया और जल संस्थान की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला न केवल विभागीय समन्वय की कमी को उजागर करता है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के दौरान तकनीकी मानकों के पालन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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