गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड के पहाड़ी नगर गोपेश्वर से उठी एक छोटी सी पहल मौजूदा समय में प्रेरणा का स्रोत बनती जा रही है। टुवर्ड्स ह्यूमैनिटी संस्था के बैनर तले चल रहे अपनी प्रकृति अभियान ने साबित कर दिखाया है कि युवा यदि कुछ करने की ठान लें तो बदलाव दूर नहीं। करीब एक वर्ष से अधिक समय से सौ से ज्यादा छात्र-छात्राएं हर रविवार को अपनी पढ़ाई के बाद सफाई अभियान में जुट जाते हैं। कोचिंग क्लास के बाद ये युवा शहर के विभिन्न वार्डों, सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक परिसरों में फैल रहे कचरे को इकट्ठा करते हैं और उसे व्यवस्थित रूप से नगरपालिका तक पहुंचाते हैं। सैकड़ों टन कचरा साफ कर ये युवा न केवल पर्यावरण संरक्षण कर रहे हैं, बल्कि समाज को जिम्मेदारी का संदेश भी दे रहे हैं।
इस अभियान की गूंज अब गोपेश्वर से आगे बढ़ चुकी है। बदरीनाथ धाम, अलकनंदा नदी तट और रुद्रनाथ मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी इन युवाओं ने सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता का संदेश दिया है। देशभर से आने वाले तीर्थयात्री और पर्यटक इस पहल को सराहते हुए इसे अनुकरणीय बता रहे हैं। इस मुहिम की खास बात यह है कि इसमें शामिल अधिकांश युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र हैं, जो अपने व्यस्त शैक्षणिक जीवन के बावजूद समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह पहल बताती है कि नई पीढ़ी केवल करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव की धुरी भी बन सकती है।
अभियान को दिशा देने में संस्था के चेयरमैन डॉ. दीपक सिंह कुंवर की अहम भूमिका रही है। उनके नेतृत्व में यह पहल एक संगठित जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। उनका मानना है कि स्वच्छता को आदत बनाना ही स्थायी समाधान है। आज जब देश ‘स्वच्छ भारत’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ा रहा है, ऐसे में गोपेश्वर के युवाओं की यह पहल जमीनी स्तर पर उसकी सच्ची तस्वीर पेश करती है। यह मॉडल दिखाता है कि सरकार के साथ-साथ समाज की भागीदारी से ही स्थायी बदलाव संभव है। हिमालय की वादियों से उठी यह आवाज अब पूरे देश के लिए एक संदेश बन चुकी है कि अगर युवा जाग जाएं, तो स्वच्छ और सुरक्षित भारत का सपना दूर नहीं।




