चमोली। उत्तराखण्ड के विश्व प्रसिद्ध बुग्यालों में ट्रैकिंग और साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ बुग्याल क्षेत्रों में रात्रि प्रवास की अनुमति दे दी है। इस फैसले से चमोली सहित राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग, कैंपिंग और एडवेंचर पर्यटन से जुड़े युवाओं व स्थानीय पर्यटन कारोबारियों में उत्साह का माहौल है।
उत्तराखण्ड सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2018 में उत्तराखण्ड हाईकोर्ट द्वारा जारी कुछ प्रतिबंधात्मक निर्देशों में राहत प्रदान की है। अदालत ने पर्यटकों की संख्या 200 तक सीमित रखने, बुग्यालों में रात्रि प्रवास पर पूर्ण प्रतिबंध तथा बुग्यालों को राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य घोषित करने पर विचार संबंधी निर्देशों को निरस्त कर दिया है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बुग्यालों के संरक्षण से जुड़े सभी अन्य पर्यावरणीय दिशा-निर्देश पूर्व की तरह प्रभावी रहेंगे और उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के 20 जुलाई 2026 के आदेश के अनुपालन में बद्रीनाथ वन प्रभाग, चमोली ने सभी रेंज अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में बुग्याल संरक्षण से जुड़े शेष नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश जारी किए हैं।
इस फैसले से उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तराखण्ड में ट्रैकिंग, कैंपिंग और साहसिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। साथ ही स्थानीय गाइड, पोर्टर, होमस्टे संचालकों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी, जबकि पर्यावरण संरक्षण के नियमों का प्रभावी पालन भी सुनिश्चित रहेगा।



