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राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड की SCERT शाखा ने की 2013 का अकादमिक ढांचा लागू करने की मांग

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posted on : दिसम्बर 5, 2025 1:28 पूर्वाह्न

देहरादून : राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड की SCERT शाखा ने बुधवार को खुला आरोप लगाया कि कुछ विभागीय अधिकारियों की व्यक्तिगत स्वार्थ साधने की वजह से राज्य की शीर्ष शिक्षक शिक्षा संस्था SCERT उत्तराखंड को अकादमिक संस्थान के बजाय एक साधारण प्रशासनिक निदेशालय बनाने की साजिश चल रही है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 2013 वाला मूल ढांचा बहाल नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश के शिक्षक सड़कों पर उतरेंगे।

2013 में बना था मजबूत अकादमिक ढांचा

केंद्र प्रायोजित शिक्षक शिक्षा पुनर्गठन योजना के तहत 27 जून 2013 को उत्तराखंड में SCERT को RTE की धारा 27A के अंतर्गत राज्य की शीर्ष अकादमिक संस्था घोषित किया गया था। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे उच्च अकादमिक पद सृजित किए गए थे, जिनकी योग्यता NCERT और क्षेत्रीय शिक्षा संस्थानों (RIE) के बराबर रखी गई थी। अधिकांश खर्च भी केंद्र सरकार ही वहन करने वाली थी।

बार-बार भेजे जा रहे संशोधित प्रस्ताव

राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड की SCERT के अनुसार शासन ने कई बार 2013 शासनादेश की नियमावली मांगी, लेकिन SCERT प्रशासन ने जानबूझकर नियमावली नहीं भेजी। इसके बजाय बार-बार संशोधित प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, जिनमें अकादमिक पदों को खत्म कर प्रशासनिक पदों को बढ़ाया जा रहा है। वजह साफ है – वर्तमान में पदस्थ अधिकांश अधिकारी UGC/NET/PhD जैसी जरूरी अकादमिक योग्यता नहीं रखते, इसलिए वे अपने पद बचाने के लिए मूल ढांचा ही बदलवाना चाहते हैं।

NEP-2020 और केंद्र के मानकों का खुला उल्लंघन

SCERT शाखा अध्यक्ष विनय थपलियाल व मंत्री अखिलेश डोभाल ने कहा कि नए प्रस्ताव न तो भारत सरकार के 2013 दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं और न ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के। NEP-2020 में स्पष्ट है कि SCERT व DIET को चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) चलाना अनिवार्य है, जिसके लिए UGC मानक वाले प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर जरूरी हैं।

अकादमिक संस्थान या नया निदेशालय?

बैठक में तीखा सवाल उठा कि जब अकादमिक संस्थान बनाना था तो अब SCERT को निदेशालय क्यों बनाया जा रहा है? प्रशासनिक काम तो पहले से ही माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय कर रहे हैं। संघ ने कहा कि शीर्ष अकादमिक संस्थान में बैठे अधिकारियों की योग्यता संस्थान के किसी भी सामान्य शिक्षक से कम नहीं होनी चाहिए।

संघ ने दी साफ चेतावनी

संघ ने शासन-प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर 2013 वाला मूल अकादमिक ढांचा लागू करने की मांग की है। संघ ने चेताया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो SCERT से जुड़े सैकड़ों शिक्षक व कार्मिक सड़कों पर उतरेंगे, धरना-प्रदर्शन करेंगे और माननीय न्यायालय की शरण लेंगे। साथ ही केंद्र सरकार को भी इस केंद्र प्रायोजित योजना के उल्लंघन की शिकायत की जाएगी। शिक्षक संघ ने कहा कि SCERT का अकादमिक स्वरूप बचाना राज्य के लाखों बच्चों के भविष्य की लड़ाई है।

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