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POSOCO – HRED IIT ने पूरे भारत में विद्युत प्रणाली संचालन के लिए जल और नवीकरणीय ऊर्जा पर किया एमओयू साइन

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posted on : मार्च 17, 2022 9:15 अपराह्न
 
रुड़की : जल और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (एचआरईडी, आईआईटी रुड़की) ने भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले एक सीपीएसई, पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीओएसओसीओ) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह एक विश्वसनीय, कुशल और सुरक्षित तरीके से भारतीय विद्युत प्रणाली के चौबीस घंटे एकीकृत संचालन को सुनिश्चित कर उसकी निगरानी करते हुए एक महत्वपूर्ण मिशन के लिए काम करता है। एमओयू के तहत दोनों पक्षों ने एचआरईडी, आईआईटी रुड़की तथा जल और नवीकरणीय ऊर्जा पर संबंधित विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर सहमति व्यक्त की है, जिसका उपयोग भारतीय विद्युत प्रणाली के बेहतर प्रबंधन और विश्लेषण के उद्देश्यों के लिए पूरे भारत में पावर सिस्टम ऑपरेटरों द्वारा किया जाएगा। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का कार्यक्रम आईआईटी रुड़की में ऑनलाइन संपन्न हुआ।

एमओयू के तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:

  • हाई वेरिएबल रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन के तहत संचालन (ऑपरेशन) के सिंक्रोनस कंडेनसर मोड की चुनौतियों और लाभों का अध्ययन
  • हाई वेरिएबल रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन के तहत हाइड्रो–थर्मल–रिन्यूएबल शेड्यूलिंग एंड कोऑर्डिनेशन
  • हिमालयी नदियों में गाद निगरानी के लिए अग्रिम चेतावनी प्रणाली
  • कैस्केड में जलविद्युत स्टेशनों के लिए अनुकूलन का अध्ययन
  • वाइड–एरिया मेजरमेंट सिस्टम (डब्ल्यूएएमएस) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करना।

इस पार्टनरशिप पर आईआईटी रुड़की के एचआरईडी प्रमुख एमके सिंघल ने कहा, “हाइड्रो–थर्मल–रिन्यूएबल शेड्यूलिंग और कोआर्डिनेशन में सुधार करने के साथ ही अक्षय ऊर्जा के ग्रिड एकीकरण में सुधार और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में जलविद्युत के लाभों का पूरी तरह से फायदा उठाने के लिए, एचआरईडी, आईआईटी रुड़की हाई वेरिएबल रिन्यूएबल जेनरेशन के तहत पावर सिस्टम के मॉडलिंग और सिमुलेशन के लिए रोडमैप पेश करेगा।“

NRLDC, POSOCO के प्रमुख व मुख्य महाप्रबंधक (I/C) श्री राजीव पोरवाल ने कहा, “POSOCO एचआरईडी और आईआईटी रुड़की के अन्य विभागों के साथ सहयोग करेगा, जैसे कि कैस्केड में जलविद्युत स्टेशनों के अनुकूलन जैसे अध्ययन करने के लिए। दोनों संगठन मिलकर उपरोक्त क्षेत्रों सहित भारतीय विद्युत प्रणालियों से जुड़ी समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करेंगे। POSOCO यथार्थवादी अध्ययन के लिए वास्तविक डेटा भी साझा करेगा। आवश्यकता पड़ने पर POSOCO एचआरईडी और आईआईटी रुड़की के अन्य विभागों को आवश्यक डेटा/सहयोग प्रदान करने के लिए हाइड्रो स्टेशनों के साथ समन्वय करेगा।  इस सहयोग से प्राप्त लाभों को POSOCO द्वारा एचआरईडी और आईआईटी रुड़की के अन्य विभागों के साथ साझा किया जाएगा। इसके अलावा, POSOCO और आईआईटी रुड़की संयुक्त रूप से ज्ञान बाँटने और सूचना प्रसार की दिशा में काम करेंगे।”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, एसआरआईसी आईआईटी रुड़की के डीन, प्रो मनीष श्रीखंडे ने कहा, “हाइड्रो–थर्मल–रिन्यूएबल शेड्यूलिंग और कोआर्डिनेशन के अध्ययन के दौरान पनबिजली (हाइड्रोपावर) संयंत्रों में पानी के पहलुओं के अधिक सटीक मॉडलिंग को सक्षम करने के लिए एचआरईडी, आईआईटी रुड़की और POSOCO के बीच पार्टनरशिप महत्वपूर्ण है। उच्च स्तर के इन्वर्टर–आधारित वितरित ऊर्जा संसाधनों, बिजली इलेक्ट्रॉनिक्स भार और बैटरी भंडारण के साथ भविष्य की भारतीय बिजली प्रणाली सिस्टम संचालन के मॉडलिंग में सुधार पर निर्भर है।

इस पार्टनरशिप की पृष्ठभूमि के बारे में बताते हुए, एचआरईडी, आईआईटी रुड़की की फैकल्टी प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा, “एचआरईडी, आईआईटी रुड़की और संबंधित विभागों का ध्यान भारत में उन क्षेत्रों का पता लगाने पर होगा, जहां सिंक्रोनस कंडेनसर सबसे अधिक फायदेमंद होने की संभावना है। इस प्रकार, यह कोलैबोरेशन अध्ययन को सुविधाजनक बनाएगा ,जो अक्षय प्रवेश स्तरों (रिन्यूएबल पेनेट्रेशन लेवल्स) की पहचान करने में मदद करेगा, जिस पर ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सिंक्रोनस कंडेनसर मोड महत्वपूर्ण हो जाएगा और सिंक्रोनस कंडेनसर द्वारा ग्रिड की स्थिरता के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। “

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