कोटद्वार : आम आदमी पार्टी ने तपोवन में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट की टनल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन पर चिंता जताई हैं। कोटद्वार में आप उपाध्यक्ष शिशुपाल रावत ने कहा कि शनिवार को घटना के 6 दिन बीत गए हैं जबकि अभी भी लगभग 166 के लोग लापता हैं जबकि 38 शव अब तक बरामद हो चुके हैं लेकिन सबसे बड़ी चिंता का विषय टनल में फंसे वो 30 से 35 मजदूर हैं जो पिछले 6 दिनों से अन्दर फंसे हैं । जहां ऑक्सीजन की कमी है और रेस्क्यू टीम अब तक मलबे को पूरी तरह हटा कर वहां तक पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाई ।
आप उपाध्यक्ष ने एनटीपीसी के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा पहले एनटीपीसी ने जिस टनल में मजदूरों के फंसे होने की बात कही ओर वहां रेस्क्यू टीम प्रयास कर रही थी बाद में पता चला उस टनल में काम ही नहीं चल रहा था। यही नहीं वहां रेस्क्यू ऑपरेशन में मशीनों की वजह से भी तमाम दिक्कतें आई जहां कई बार मशीन खराब होने की बात भी सामने आई।
आपदा प्रबंधन पर सवाल खड़े करते हुए पार्टी ने कहा सबसे बड़ा सवाल वहां पिछले 6 दिनों से मौजूद उन परिजनों के दिमाग में है जो अपनों के इंतज़ार में पिछले 6 दिनों से बेतहाशा इधर उधर भटक रहे हैं । हालत ये हो गए कि अब प्रशासन, सरकार के खिलाफ वो लोग नारेबाजी और विरोध में उतर आए ।कई परिजन ऐसे भी हैं जो अब हताश होकर अपने घरों को खाली हाथ लौटने लगे हैं। पार्टी ने बयान दिया कि तबाही से 13 गांवों का संपर्क मुख्य घारा से कट चुका है। इन गांवों को जोडने वाले 5 पुल बह गए हैं। अभी भी कुछ लोग टनल में फंसे हुए हैं जिन्हें रेस्क्यू के लगातार दिन रात प्रयास किए जा रहे हैं।हम आशा करते हैं कि वो लोग अभी सुरक्षित हों।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2013 में केदारनाथ में आई जलप्रलय त्रासदी से आखिर सरकार ने क्या सबक लिया? जलवायु परिवर्तन से पिघल रहे ग्लेशियर के कारण बन रही झीलों को क्यों स्टडी नही किया जा रहा । सवाल यही है कि, जब हर सरकार विकास का श्रेय लेती है, तो विकास की कीमत पर होने वाले किसी भी विनाश का जिम्मा क्यों नहीं लेती ? यह अब स्थापित तथ्य होने जा रहा है कि उत्तराखंड में कोई आपदा यूं ही नहीं आती।यहां विनाश का सीधा संबंध सरकारी विकास से है।नीति घाटी में आई आपदा एक उदाहरण है, सरकार की ऐजेंसियां भले ही यहां फेल हो गयी मगर नीति घाटी के ग्रामीणों को किसी भी अनहोनी का अंदेशा काफी पहले से था।



