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केदारनाथ अतिथि सत्कार व्यय विवाद: पूर्व अधिकारियों के बचाव में शासनादेशों का हवाला, अधिकारियों के खिलाफ कौन कर रहा षड्यंत्र?

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posted on : जुलाई 17, 2026 12:48 पूर्वाह्न

देहरादून/गोपेश्वर। वर्ष 2025 में श्री केदारनाथ धाम के कपाटोद्घाटन के दौरान वीआईपी अतिथियों के स्वागत-सत्कार एवं व्यवस्थाओं पर हुए खर्च को लेकर उठे वित्तीय अनियमितता के आरोपों के बीच अब तत्कालीन बीकेटीसी अधिकारियों के बचाव में शासनादेशों का हवाला दिया जा रहा है। संबंधित पक्षों का दावा है कि तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी द्वारा किया गया व्यय शासन के प्रावधानों और मंदिर समिति की स्थापित परंपराओं के अनुरूप था और इसे अनियमितता बताना तथ्यों से परे है।

सीईओ के पास थी जिम्मेदारी

जानकारी के अनुसार तत्कालीन बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कार्यकाल 7 जनवरी 2025 को समाप्त हो गया था, जबकि नए अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने 6 मई 2025 को पदभार ग्रहण किया। इस बीच 2 मई को श्री केदारनाथ तथा 4 मई को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुले। उस अवधि में मंदिर समिति में न तो अध्यक्ष था और न ही नया बोर्ड गठित हुआ था। ऐसे में समिति के समस्त प्रशासनिक कार्यों का संचालन तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल के जिम्मे था।

2012 के शासनादेश का दिया जा रहा हवाला

संबंधित पक्षों का कहना है कि उत्तराखंड शासन के धर्मस्व विभाग द्वारा 22 नवंबर 2012 को जारी कार्यालय ज्ञापन में स्पष्ट प्रावधान है कि अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने अथवा नए अध्यक्ष की नियुक्ति तक मंदिर समिति के दैनिक एवं गैर-नीतिगत कार्यों का संचालन मुख्य कार्याधिकारी करेंगे। इसी आधार पर तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी द्वारा प्रशासनिक निर्णय लिए गए।

1985 के शासनादेश में भी बताए गए वित्तीय अधिकार

बताया जा रहा है कि अविभाजित उत्तर प्रदेश शासन के 29 मार्च 1985 के शासनादेश में भी मुख्य कार्याधिकारी को कार्यालयाध्यक्ष के अधिकार प्रदान किए गए थे। संबंधित पक्षों का दावा है कि अध्यक्ष की अनुपस्थिति में शासन ने मुख्य कार्याधिकारी के वित्तीय अधिकारों पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया था, जिससे नियमित प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों के निष्पादन का अधिकार उनके पास था।

वीआईपी सत्कार पर हुआ व्यय नियमसम्मत!

संबंधित सूत्रों के अनुसार 2 मई 2025 को श्री केदारनाथ धाम के कपाटोद्घाटन के अवसर पर वीआईपी अतिथियों के स्वागत, आवास, भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं पर जो व्यय किया गया, वह मंदिर समिति के स्वीकृत बजटीय प्रावधानों और पूर्व से चली आ रही व्यवस्थाओं के अनुरूप था। दावा किया जा रहा है कि सभी भुगतान तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी द्वारा उपलब्ध प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों के तहत किए गए।

जांच रिपोर्ट पर भी उठ रहे सवाल

वर्तमान बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के कार्यभार ग्रहण करने के बाद वर्ष 2025 के कपाटोद्घाटन के दौरान हुए व्यय की जांच के लिए विभागीय समिति गठित की गई। सूत्रों के अनुसार समिति की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है, जिसमें वीआईपी अतिथि सत्कार पर हुए खर्च को वित्तीय अनियमितता के रूप में प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई है।

हालांकि मामले से जुड़े जानकारों का आरोप है कि जांच रिपोर्ट में 2012 और 1985 के शासनादेशों में वर्णित प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों के प्रावधानों का समुचित उल्लेख नहीं किया गया। उनका कहना है कि इससे तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, तत्कालीन प्रभारी अधिकारी केदारनाथ अनिल ध्यानी तथा संबंधित व्यवस्थापक अरविंद शुक्ला के विरुद्ध कार्रवाई का आधार तैयार किया जा रहा है।

संबंधित पक्षों का दावा, तथ्यों की अनदेखी

संबंधित पक्षों का कहना है कि उस समय की प्रशासनिक परिस्थितियों और शासनादेशों के प्रावधानों को निष्पक्ष रूप से देखा जाए तो तत्कालीन अधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णय विधिसम्मत अधिकारों के दायरे में थे। उनका आरोप है कि वीआईपी अतिथि सत्कार पर हुए व्यय को वित्तीय अनियमितता के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यों के विपरीत है तथा शासन के पूर्व आदेशों की अनदेखी कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का माहौल बनाया जा रहा है।

 

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