रुद्रप्रयाग : जिले के जाखधार में शुक्रवार को पौराणिक परम्पराओं और मान्यताओं के साथ जाख मेले को आयोजन किया गया। इस दौरान भगवान शिव के यक्ष रुप जाख देवता ने अपने पश्वा पर अवतरित होकर अंगारों पर नृत्य कर भक्तों को दर्शन देकर आशीर्वाद दिया। शुक्रवार को यहां दोपहर में जाख देवता की दिवारा यात्रा भ्यत्त गांव से क्वठ्याड़ा गांव होते हुए देवशाल गांव पंहुंची। जहां भक्तों व देवशाल गांव के ब्राहमणों ने जाख देवता के जयकारों और ढोल-दामऊं की ताल पर दिवारा यात्रा का स्वागत किया। इस दौरान ब्राहमणों ने हरियाली व फूल मालाओं के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जाख देवता की पूजा-अर्चना की। जिसके पश्चात जाख देवता ने देवशाल गांव में विंध्यवासिनी देवी से भेंट कर श्रद्धालुओं के साथ अपने देवस्थल पहुंचे। इस दौरान जाख देवता ने अपने पश्वा पर अवतरित होकर धधकते हुए अंगारों में नृत्य कर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद दिया। इससे पूर्व रात्रि को मूंडी प्रज्वलन की परंपरा का निर्वहन किया गया। इस दौरान ग्रामीणें ने जाखधार में रात्रि जागरण किया।
क्या है जाख मेले की धार्मिक और पौराणिक परम्परा
आचार्य योगेंद्र देवशाली, अनुसूया देवशाली, महेंद्र देवशाली, भगवती प्रसाद देवशाली, विनोद देवशाली, मनोज देवशाली, श्रीकृष्ण देवशाली, गणेश प्रसाद भट्ट, ललित देवशाली ने बताया कि 11वीं सदी में नेपाल के कालकोट क्षेत्र से कोई चरवाहा आ रहा था। जिसके बाद केदारभूमि में शिव ने स्वयं को जाख नामक स्थान में स्थापित करने को आदेशित किया था। जिसके बाद से ही मेले के रूप में यह परंपरा निरन्तर चली आ रही है। उन्होंने बताया कि मेले के दौरान जाख के पश्वा प्रतिवर्ष अग्नि प्रवेश कर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।




