सोमवार, अक्टूबर 5, 2026
  • Advertise with us
  • Contact Us
  • Donate
  • Ourteam
  • About Us
  • E-Paper
  • Video
liveskgnews
Advertisement
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स
No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स
No Result
View All Result
liveskgnews
5th अक्टूबर 2026
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स

इस बार हिमालय में खूब खिला मां नंदा का प्रिय देवपुष्प ब्रह्मकमल

शेयर करें !
posted on : सितम्बर 15, 2026 12:55 पूर्वाह्न

गोपेश्वर (चमोली)। मां नंदा की बड़ी जात जैसे-जैसे हिमालय की ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे हिमालय भी अपनी खूबसूरती से श्रद्धालुओं का स्वागत कर रहा है। इस बार उच्च हिमालयी क्षेत्र में मां नंदा के प्रिय माने जाने वाले देवपुष्प ब्रह्मकमल के बड़ी संख्या में खिलने की सुखद तस्वीर सामने आई है। रूपकुंड, भगुवासा, बदरीनाथ-नीलकंठ, फूलों की घाटी, हेमकुंड, नंदीकुंड, सप्तकुंड और छिपलाकेदार समेत कई उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ब्रह्मकमल की खूब बहार दिखाई दे रही है।

हिमालयी बुग्यालों का भ्रमण कर लौटे पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल, ट्रैकर मोहन दानू और हिमालयी क्षेत्रों में पुश्तैनी रूप से बकरी पालन करने वाले पालसियों ने बताया कि इस बार लंबे समय बाद इतनी अधिक संख्या में ब्रह्मकमल खिला दिखाई दे रहा है। चमोली और रुद्रप्रयाग से लेकर पिथौरागढ़ तक के उच्च हिमालयी इलाकों में इसके खिलने से प्रकृति प्रेमियों में खासा उत्साह है।

नंदा पूजा में देवपुष्प का विशेष महत्व

स्थानीय भाषा में ब्रह्मकमल को कौंलु भी कहा जाता है। मां नंदा की बड़ी जात, जन्माष्टमी, नंदाष्टमी और पहाड़ के विभिन्न नंदा कौथिगों में इस पुष्प का विशेष धार्मिक महत्व है। नंदा पूजा में ब्रह्मकमल का इस्तेमाल किया जाता है। पंचकेदारों में भी इस देवपुष्प से भगवान शिव की पूजा किए जाने की परंपरा बताई जाती है। श्रद्धालुओं के लिए भी इसका प्रसाद के रूप में विशेष महत्व है।

मां नंदा की 12 वर्ष में होने वाली बड़ी जात यात्रा में ब्रह्मकमल को विशेष प्रसाद माना जाता है। यही वजह है कि बड़ी जात के दौरान ऊंचे हिमालय में इसकी मौजूदगी श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ प्रकृति के खूबसूरत संयोग का भी प्रतीक बन गई है।

तीन से पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर खिलता है

ब्रह्मकमल उच्च हिमालयी क्षेत्रों में करीब तीन से पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर कम तापमान में पाया जाने वाला पुष्प है। इसका वानस्पतिक नाम सॉसुरिया ओबोवेलाटा है और यह एस्टेरेसी कुल का पौधा है। उत्तराखंड में इसे ब्रह्मकमल, जबकि हिमालय के अलग-अलग क्षेत्रों में इसके अलग स्थानीय नाम प्रचलित हैं।

भारत में यह उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। नेपाल, भूटान, म्यांमार और पाकिस्तान के हिमालयी क्षेत्रों में भी इसकी मौजूदगी बताई जाती है। उत्तराखंड में पिंडारी, चिफला, रूपकुंड, हेमकुंड, फूलों की घाटी और केदारनाथ जैसे दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्रों में यह प्रमुखता से दिखाई देता है।

लोक आस्था में भी गहरी जड़ें

ब्रह्मकमल को लेकर हिमालयी समाज में अनेक धार्मिक मान्यताएं और लोककथाएं प्रचलित हैं। इसे ब्रह्मा का कमल और मां नंदा का प्रिय पुष्प माना जाता है। मान्यता है कि इसे नंदाष्टमी के समय विशेष नियमों के साथ तोड़ा जाता है। अगस्त के आसपास खिलने वाला यह पुष्प कुछ समय बाद बीज धारण करता है।

महाभारत से जुड़ी लोककथा में भी ब्रह्मकमल का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि द्रौपदी इसके अद्भुत रूप और सुगंध से प्रभावित हुई थीं और उन्होंने भीम से इसे लाने की इच्छा जताई। इसी प्रसंग से बदरीकाश्रम क्षेत्र में भीम और हनुमान की कथा भी जोड़ी जाती है, जहां हनुमान ने भीम का गर्व चूर किया था।

औषधीय उपयोगों की भी मान्यता

स्थानीय स्तर पर ब्रह्मकमल के विभिन्न हिस्सों के औषधीय उपयोग की परंपरा बताई जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल चोट, जले-कटे और कुछ पारंपरिक उपचारों में किए जाने की बातें कही जाती हैं। हालांकि इसके औषधीय गुणों से जुड़े दावों को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर ही स्वीकार किया जाना चाहिए।

बड़ी जात के इस वर्ष के सफर में ब्रह्मकमल की यह बहार इसलिए भी खास है कि एक ओर पहाड़ की बेटी नंदा अपने मायके से कैलाश की ओर विदा हो रही है, वहीं दूसरी ओर हिमालय में खिला उसका प्रिय देवपुष्प इस यात्रा को प्रकृति और आस्था के अद्भुत रंग से भर रहा है।

https://liveskgnews.com/wp-content/uploads/2026/10/SWAROJGAR-EVAM-UDYAMITA-YOJANA_compressed.mp4
https://liveskgnews.com/wp-content/uploads/2026/10/हर-दिशा-से-जुड़-रहा-_उत्तराखंड_-2.00-MIN_compressed.mp4

हाल के पोस्ट

  • वारंटियो के विरूद्ध दून पुलिस की ताबड़तोड़ कार्यवाही, विगत 2 दिवस में 12 वारंटियो को पुलिस ने किया गिरफ्तार
  • विकास भी, विरासत भी और जनसुविधा भी – धामी सरकार ने तेज की शहरों को संवारने की कवायद
  • मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में चम्पावत को मिल रही विकास की नई पहचान, ₹237.74 करोड़ के आईएसबीटी सहित शारदा घाट, गोल्ज्यू कॉरिडोर और मंदिरों के सौंदर्यीकरण कार्यों को गति
  • विरासत की ताकत, विकास की रफ्तार से बदलेगा चम्पावत – मुख्यमंत्री धामी
  • खाद्य सुरक्षा विभाग की देर रात नन्हेड़ा अनेतपुर में बड़ी कार्रवाई, पामोलीन से पनीर बनाने का खेल बेनकाब, 2 क्विंटल एनालॉग पनीर किया नष्ट
  • जनजातीय संस्कृति, परंपरा और गौरव का उत्सव बना उत्तराखंड आदि रंगोत्सव, खटीमा में बिखरे सांस्कृतिक विविधता के रंग
  • बनबसा-टनकपुर क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई रफ्तार, सीएम धामी ने की जनहित से जुड़ी चार महत्वपूर्ण घोषणाएं
  • सीमांत क्षेत्रों तक सरकार, विकास को नई रफ्तार; बनबसा में हुई पहली बार धामी कैबिनेट की बैठक, दर्जनों महत्वपूर्ण निर्णयों पर लगी मुहर
  • संजीव के “मांजी मसाले” ने पहाड़ में जमाई धाक, कई जिलों तक पहुंचा कारोबार
  • सड़कों की हकीकत परखने उतरे एसडीएम संदीप कुमार, कौड़िया-मोटाढाक और कोटद्वार-मवाकोट-कण्वाश्रम मार्ग का निरीक्षण, बारिश में उखड़े पैच और दरारों पर विभाग को दिए सख्त निर्देश
liveskgnews

सेमन्या कण्वघाटी हिन्दी पाक्षिक समाचार पत्र – www.liveskgnews.com

Follow Us

  • Advertise with us
  • Contact Us
  • Donate
  • Ourteam
  • About Us
  • E-Paper
  • Video

© 2017 Maintained By liveskgnews.

No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स

© 2017 Maintained By liveskgnews.