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संस्कृत और रामायण के जरिए भारत-मलेशिया के सांस्कृतिक संबंध होंगे मजबूत

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posted on : सितम्बर 19, 2026 11:10 अपराह्न
  • उत्तराखंड के सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार ने मलेशिया उच्चायोग में की महत्वपूर्ण बैठक।
  • विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पर बनी सहमति।

नई दिल्ली । उत्तराखंड शासन में सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित मलेशिया गणराज्य के उच्चायोग में चार्ज डी अफेयर्स शरीफा एज्नीदा वफा से भेंट की। इस दौरान भारत और मलेशिया के बीच उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के उत्थान, प्रचार-प्रसार के साथ ही दोनों देशों के द्विपक्षीय सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और भाषाई संबंधों को और मजबूत करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में सचिव दीपक कुमार ने उत्तराखंड सरकार की ओर से देवभाषा संस्कृत तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल को दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावना और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संस्कृत तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

सचिव दीपक कुमार ने मलेशिया स्थित विश्वविद्यालयों एवं सांस्कृतिक संस्थानों को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार तथा संस्कृत संस्थानम् के साथ जोड़कर संयुक्त रूप से कार्य करने के लिए आठ बिंदुओं वाली कार्ययोजना भी प्रस्तुत की। उन्होंने दोनों देशों के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के बीच सहयोग को संस्थागत रूप देने की इच्छा व्यक्त की।

रामायण के माध्यम से सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर

बैठक में भारत और मलेशिया के बीच रामायण तथा संस्कृत भाषा के माध्यम से सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों और प्रोफेसरों के लिए एक्सचेंज कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

इसके अलावा ‘वाल्मीकि रामायण’ और ‘हिकायत सेरी रामा’ के तुलनात्मक अध्ययन, दक्षिण-पूर्व एशिया में रामायण की परंपरा को भारत और मलेशिया की साझा विरासत के रूप में अध्ययन करने तथा भारत-मलेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में मलेशिया की भारतीय डायस्पोरा समुदाय की भूमिका जैसे विषयों को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया।

उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का प्रस्ताव

बैठक में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार अथवा संस्कृत संस्थानम् में मलेशिया के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसमें दोनों देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और सांस्कृतिक विशेषज्ञों की भागीदारी की संभावना पर चर्चा हुई।

मलेशिया की चार्ज डी अफेयर्स शरीफा एज्नीदा वफा ने प्रस्तावित विषयों को महत्वपूर्ण बताते हुए भारतीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ मिलकर काम करने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार को एक कॉन्सेप्ट नोट तैयार कर प्रस्तुत करने का सुझाव दिया।

चारधाम और संस्कृत को लेकर मलेशियाई प्रतिनिधि ने जताई प्रसन्नता

वार्ता के दौरान मलेशियाई प्रतिनिधि ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि उत्तराखंड में बदरीनाथ और केदारनाथ सहित विश्व प्रसिद्ध चारधाम स्थित हैं तथा राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। बैठक में उत्तराखंड की धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं और संस्कृत भाषा की भूमिका को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया।

बैठक में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार की ओर से प्रो. (डॉ.) अरविंद नारायण मिश्र ने प्रतिनिधित्व किया। वहीं मलेशिया उच्चायोग की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी (पॉलिटिकल) अहमद रादजी मोहम्मद जिम भी उपस्थित रहे।

बैठक को भारत-मलेशिया के बीच संस्कृत, रामायण, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के क्षेत्र में भविष्य के सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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