बेतालघाट : बेतालघाट ब्लॉक के बसगांव क्षेत्र में कोसी नदी के किनारे भयावह स्थिति पैदा हो गई है। आवासीय भवनों के ठीक नीचे 200 मीटर दायरे में 1 मीटर गहरी दरारें और धंसाव देखे जाने से दर्जनभर परिवारों के घरों पर संकट मंडरा रहा है। श्री कैंची धाम तहसील प्रशासन ने शनिवार को स्थलीय निरीक्षण कर खतरे की पुष्टि की। ग्रामीणों में दहशत फैल गई है और बारिश की आशंका से रातों की नींद उड़ गई है।
दरारों का भयानक नजारा
ग्रामीणों के अनुसार, बीते शुक्रवार को दरारों की गहराई देखकर सबके होश उड़ गए। घरों के नीचे लंबी-चौड़ी दरारें फैल चुकी हैं, जो लगातार गहरा रही हैं। कोसी नदी की ओर से भी नई दरारें उभर रही हैं, जिससे पूरे गांव में धंसाव की आशंका बढ़ गई है। किसानों ने घरों के ऊपरी हिस्से में बने पेयजल टैंकों से रिसाव को धंसाव का कारण बताया है।
प्रशासन ने किया निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम मोनिका के निर्देश पर राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद शकील अपनी टीम के साथ शनिवार को गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें खतरे की पूरी जानकारी दी और स्थलीय निरीक्षण करवाया। जांच में 10 से अधिक मकानों के खतरे की जद में होने की पुष्टि हुई। एक घर की सुरक्षा दीवार में दरार पहुंचने से चिंता और बढ़ गई। कई अन्य जगहों पर भी गहरी दरारें देखी गईं।
ग्रामीणों का आक्रोश और आशंका
स्थानीय निवासी अनूप सिंह नेगी ने कहा, “समय रहते कार्रवाई न हुई तो घरों पर कई गुना खतरा बढ़ जाएगा। रात को नींद नहीं आती।” मोहन सिंह, दीवान सिंह, पूरन सिंह, प्रताप सिंह और लक्ष्मी दत्त नैनवाल ने भी तत्काल राहत की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश होते ही स्थिति और बिगड़ सकती है।
परिवारों के विस्थापन की तैयारी
राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद शकील ने बताया, “दरारों से खतरा स्पष्ट है। रिपोर्ट उपजिलाधिकारी को भेजी जा रही है। भूगर्भीय सर्वेक्षण से धंसाव के असल कारणों का पता चलेगा।” प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भी सूचित कर दिया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भू-वैज्ञानिकों की टीम तुरंत भेजी जाए और क्षतिग्रस्त घरों का आकलन कर मुआवजा दिया जाए। कोसी नदी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे इलाके में भू-कटाव की समस्या गंभीर रूप ले रही है।


