पोखरी / चमोली । चमोली जिले के पोखरी ब्लॉक नैल गांव के दुव्यांणा के 32 परिवार आठ वर्षों से पुर्नवास के लिये सरकारी मदद की राह ताक रहे हैं। लेकिन वर्तमान तक ग्रामीणों के पुर्नवास या सुरक्षा को लेकर कोई योजना तैयार नहीं हो सकी है। ऐसे में यहां ग्रामीण आज भी अपने दरके घरों में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मामले तहसील प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई जा चुकी है।
बता दें, वर्ष 2012 में आपदा के दौरान पोखरी ब्लॉक के नैल गांव में हुए भूस्खलन से दुव्यांणा तोक के 32 परिवार प्रभावित हो गये थे। जिसके बाद ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन द्वारा भू-गर्भीय सर्वे करवाई गई थी। जिसमें दुव्यांणा तोक को असुरक्षित बताया गया था। लेकिन उसके बाद से वर्तमान तक दुव्यांणा के इन 32 परिवारों की सुरक्षा को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
स्थानीय निवासी संदीप गुसांई, शीशपाल राणा और देवेंद्र राणा का कहना है कि वर्ष 2012 के बाद से लगातार तहसील, जिला प्रशासन, स्थानीय जन प्रतिनिधियों सहित मुख्यमंत्री से पुर्नवास की मांग की जा रही है। कहा कि क्षेत्र में बारिश होने पर खौफ के चलते ग्रामीण रात-रात भर रतजगा करने को मजबूर हैं। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से आपदा प्रभावितों के पुर्नवास और सुरक्षा को लेकर किये जा रहे दावों की पोल खुल रही हैं।
“नैल के दुव्यांणा तोक के ग्रामीणों की सुरक्षा के लिये जल्द भू-गर्भीय सर्वे करवाई जाएगी। भू-गर्भीय सर्वे रिपोट के आधार पर गांव के पुर्नवास अथवा सुरक्षा कार्य के लिये योजना तैयार की जाएगी।”
नंदकिशोर जोशी, आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली।





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