गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बदरीनाथ के पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चैहान को एसआईटी टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। चैहान 30 जून को सेवानिवृत्त हुए थे।
बदरीनाथ मंदिर दान चोरी प्रकरण में एसआईटी की लगातार चल रही जांच के बीच पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चैहान को गिरफ्तार कर लिया गया है। बदरीनाथ में एसआईटी की ओर से चार घंटे की लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की गई है। राजेंद्र चैहान को शनिवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। बताया जा रहा है कि गुरूवार सुबह ही पुलिस टीम ने बदरीनाथ मंदिर में पहुंचकर मंदिर के कंट्रोल रूम से पिछले माह की सभी सीसीटीवी हार्ड डिस्क कंप्यूटर व अन्य उपकरणों को अपनी कस्टडी में लिया था। एक्सपर्ट टीम ने हार्ड डिस्क की जांच की। बताया जा रहा है कि चैहान को सीसीटीवी फुटेज में 22, 25 तथा 29 जून को गणना कक्ष की नगदी की हेराफेरी करते हुए देखा गया था। एसआईटी टीम की द्वारा चार घंटे की लंबी पूछताछ के बाद राजेंद्र चैहान को शुक्रवार को करीब 3 बजे गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि शनिवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने गिरफ्तारी की पुष्टि की। बताया कि बदरीनाथ में ही आरोपी से और भी पूछताछ की जा रही है।
गौरतलब है कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में बीकेटीसी के अध्यक्ष का पीए प्रमोद नौटियाल पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। नौटियाल मौजूदा समय में जिला कारागार पुरसाडी में न्यायिक अभिरक्षा में है।
बीते दिनों बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित अनियमितता की जांच के बीच बीकेटीसी के चढ़ावे के रखरखावे से जुड़े रजिस्टर में ओवर राइटिंग पाई जाने पर खंजानची को हटा दिया गया था। इस मामले में बताया गया था कि मंदिर के लाकर में रखी हुई चांदी की मात्रा रजिस्टर में दर्ज प्रविष्ठि की तुलना में थोड़ा अधिक होने और रजिस्टर में ओवर राइटिंग पाए जाने के बाद खंजानची को इस पद से हटाए जाने के बाद अन्यत्र भेज दिया गया था। वैसे गुरूवार को ही बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की पड़ताल के लिए बीकेटीसी की ओर से गठित जांच टीम ने गुरूवार को ही अपनी 18 पन्नो की रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें चढ़ावा की चोरी रोकने के लिए कई सुझाव भी दिए गए है। गणना के दौरान ड्रेस कोड लागू करने, मंदिर परिसर तथा गणना केंद्र अछूते स्थानों को चिह्नित कर वहां नए सीसीटीवी कैमरे लगाने, निगरानी व्यवस्था को बेहतर तथा जबावदेह बनाने तथा श्रद्धालुओं को गणना कार्य से जोड़ने की निश्चित प्रक्रिया तय करने की बात कही गई है।



