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सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला : आवारा कुत्तों को स्कूलों, अस्पतालों व हाईवे से हटाएं, शेल्टर में टीकाकरण अनिवार्य

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posted on : नवम्बर 8, 2025 2:30 अपराह्न

नई दिल्ली | आवारा कुत्तों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नगरपालिकाओं को तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कुत्तों के काटने की ‘चौंकाने वाली’ वृद्धि पर चिंता जताते हुए सड़कों, राज्य हाईवे, राष्ट्रीय राजमार्गों, स्कूलों, अस्पतालों, बस-रेलवे स्टेशनों और खेल परिसरों से सभी आवारा पशुओं को हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन्हें शेल्टर होम्स में रखा जाए, टीकाकरण किया जाए और मूल स्थान पर न छोड़ा जाए, ताकि सार्वजनिक स्थलों पर दोबारा प्रवेश न हो।

हाईवे निगरानी टीमें गठित, फेंसिंग अनिवार्य

पीठ ने आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने के लिए विशेष ‘हाईवे निगरानी टीमें’ गठित करने का निर्देश दिया। ये टीमें पशुओं को पकड़कर शेल्टर में स्थानांतरित करेंगी। इसके अलावा, सभी सरकारी संस्थानों—जैसे अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड, डिपो और रेलवे स्टेशन—को ठीक से घेराबंदी (फेंसिंग) करने का आदेश है, ताकि आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके। कोर्ट ने एनएचएआई और सड़क निर्माण एजेंसियों को आवारा पशुओं को हाईवे से हटाने और शेल्टर में स्थानांतरित करने की जिम्मेदारी सौंपी। यह फैसला एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) रूल्स 2023 के तहत मानवीय तरीके से पशु नियंत्रण पर जोर देते हुए जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है।

कुत्तों के काटने की घटनाओं पर कोर्ट की चिंता

सुनवाई के दौरान पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी और अन्य शहरों में बच्चों समेत बढ़ते रेबीज मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा कार्यालय परिसरों में कुत्तों को खिलाने की प्रवृत्ति पिछली निर्देशों का उल्लंघन है। अधिकारियों को आदेश दिया गया कि पकड़े गए कुत्तों को शेल्टर में नसबंदी, टीकाकरण और डीवर्मिंग के बाद ही रखा जाए। कोर्ट ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) को पक्षकार बनाया और एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल को अनुपालन निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी। पीठ ने राज्यों को संसाधनों का विवरण जमा करने और डिफॉल्टिंग अधिकारियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया।

3 नवंबर को चीफ सेक्रेटरी समन

यह मामला जुलाई 2025 में मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) से शुरू हुआ था, जब दिल्ली-एनसीआर में कुत्तों के काटने से रेबीज मौतें बढ़ीं। कोर्ट ने पहले सभी राज्यों को पक्षकार बनाया और एबीसी नियमों के अनुपालन पर हलफनामा मांगा। 3 नवंबर को पीठ ने डिफॉल्टिंग राज्यों के चीफ सेक्रेटरियों को तलब किया, लेकिन बाद में व्यक्तिगत हाजिरी की जरूरत न होने पर छूट दी। 7 नवंबर की सुनवाई में कोर्ट ने डिजाइनेटेड फीडिंग जोन स्थापित करने और कुत्तों को सार्वजनिक स्थलों से दूर रखने पर जोर दिया।

13 जनवरी को अगली सुनवाई

कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को निर्धारित की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आवारा पशु समस्या से निपटने में मील का पत्थर साबित होगा, लेकिन प्रभावी कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण होगा। पशु अधिकार कार्यकर्ता मानवीय दृष्टिकोण की सराहना करते हैं, जबकि नागरिक सुरक्षा समूह इसे देर से उठाया कदम बताते हैं। अधिकारियों से अपील है कि एबीसी नियमों का कड़ाई से पालन करें, ताकि कुत्तों के काटने की घटनाएं रुकें।

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