सोमवार, अगस्त 24, 2026
  • Advertise with us
  • Contact Us
  • Donate
  • Ourteam
  • About Us
  • E-Paper
  • Video
liveskgnews
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स
No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स
No Result
View All Result
liveskgnews
24th अगस्त 2026
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स

स्टील फ्रेम का पुनर्निर्माण : शासन करने से लेकर सेवा तक, समयबद्ध सुधारों का सिलसिला

शेयर करें !
posted on : अगस्त 18, 2026 6:09 अपराह्न
  • डॉ. जितेंद्र सिंह

दिल्ली : जब अंग्रेज 1947 में भारत छोड़कर वापस ब्रिटेन जाने लगे, तो वे एक मुहावरा अपने पीछे छोड़ गए : “स्टील फ्रेम”। इसे वे भारतीय सिविल सेवा कहते थे, वह प्रशासनिक ढांचा जिसके जरिए ब्रिटिश राज अपनी हुकूमत चलाता था। स्टील आसानी से नहीं झुकता, और यही वास्‍तविक बात थी। यह ढांचा एक साम्राज्य को स्थिर बनाए रखने के लिए बनाया गया था, न कि उन लोगों की बात सुनने के लिए जिन पर उसने शासन किया था। आजादी के बाद दशकों तक हमें वो फ्रेम विरासत में मिला। हमने उसे नया नाम दिया, उसे खादी का आवरण पहनाया और खुद को बताया कि अब यह हमारा अपना है। लेकिन नियंत्रण के लिए बनाया गया फ्रेम स्‍वभाविक रूप से सेवा के लिए बनाया गया ढांचा नहीं है। और हमारे गणतंत्र के पहले कई दशकों तक, भारत अपने उपनिवेशक देश के ढांचे के अंदर ही बना रहा। एक ही फॉर्म को तीन प्रतियों में दाखिल करता रहा, उन्हीं ऊंची कुर्सियों के सामने कतारों में खड़ा होता रहा और अपने भाग्य के फैसले के लिए किसी “साहब” की प्रतीक्षा करता रहा।

मैंने अपने कामकाजी जीवन का अधिकांश समय इस ढांचे के अंदर बिताया है। पहले एक नागरिक के रूप में और एक प्रोफेशनल के रूप में, फिर भारत सरकार में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन का प्रभार सौंपे गए मंत्री के रूप में, जिस विभाग का काम ही स्टील फ्रेम की जांच करना और यह पूछना है कि क्या फिर से तैयार करने की आवश्यकता है। इसलिए जब मुझसे पूछा जाता है कि क्या भारत ने अपनी नौकरशाही में सुधार किया है, तो मेरे उत्‍तर में न तो किसी संस्थान की रक्षा करने वाले व्यक्ति का ढाल बनना है, न ही किसी ऐसे व्यक्ति की निंदा है जिसने इसे छोड़ दिया है। यह एक ऐसे व्यक्ति का उत्तर है, जिसने एक ऐसी प्रणाली के बारह वर्षों के शांत लेकिन दृढ़ पुनर्निर्माण को अंदर से देखा है, जिसे स्वतंत्रता के बाद से सार्थक रूप से नहीं छुआ गया था। अगर श्री नरेन्द्र मोदी, जो अपनी पथ-प्रदर्शक सोच के लिए जाने जाते हैं, भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में पदभार नहीं संभालते तो शायद अब भी अछूता रह गया होता।

विचार करें कि हमने कहां से शुरुआत की। 2014 में, केंद्र सरकार से एक नागरिक की शिकायत को अगर हल कर लिया गया, तो इसे करने में औसतन 157 दिन लगे। अगर शिकायत दर्ज कर भी ली गई, तो इसका मतलब देश भर में फैले मुश्किल से दस हजार शिकायत अधिकारियों के साथ एक प्रणाली की खोज करना था, जिनमें से अधिकांश तक पहुंच नहीं थी और वे सभी किसी भी वास्तविक समय सीमा के प्रति कोई जवाबदेह नहीं थे। नौकरी के लिए सरकारी कार्यालय के बाहर कतार में खड़ा एक युवक, अपने पति की पेंशन फ़ाइल का पता लगा रही एक विधवा, यह जानने की कोशिश में लगा एक किसान कि उसके फसल बीमा दावे की फाइल किसी मंत्रालय की अलमारी में से क्यों गायब हो गई, इन सबके सामने एक ही स्थिति थी। उनका सामना नागरिकों को प्रतीक्षा कराने के लिए डिज़ाइन की गई एक सिस्‍टम से और ऐसे अधिकारियों से था, जिनका किसी भी परिणाम के प्रति कोई उत्‍तरदायित्‍व नहीं था। यह केवल अक्षमता नहीं थी। यह उस प्रशासन का अंतिम जीवित अवशेष था जिसका निर्माण समाधान उपलब्‍ध कराने के बजाय डराने के लिए किया गया था।

आज के साथ इसकी तुलना राय का विषय नहीं है; यह संख्याओं में वर्णित है। शिकायत निपटान का समय 157 दिन घटकर 15 दिन रह गया है। आज का हमारा सिस्‍टम नौ गुना अधिक सालाना लगभग 3 लाख से बढ़कर 27 लाख शिकायतों का निवारण करता है। इन शिकायतों का निवारण करने वाले अधिकारियों की संख्‍या दस गुना से अधिक बढ़कर एक लाख तक पहुंच गई है। इस वर्ष मार्च में ही, केंद्रीय सचिवालय ने लगातार पैंतालीसवें महीने में एक लाख शिकायतों के निवारण के आंकड़े को पार कर लिया है। हमने केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) का एक ऐसे प्‍लेटफॉर्म में निर्माण किया है जो अब 22 भाषाओं में बोलता है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके एक नागरिक की शिकायत को सही डेस्क पर ले जाता है। यहां तक कि एक दूरस्‍थ गांव में एक किसान की आवाज में, उसकी अपनी भाषा में, एक चैटबॉट के माध्यम से शिकायत दर्ज करने में सक्षम बनाता है। काफी जानबूझकर, हमने इसका नाम समाधान दीदी अर्थात् ‘समाधान करने वाली बहन’ रखा था। जिस ग्रामीण को अपने काम के लिए कभी जिला कार्यालय की यात्रा करने की आवश्यकता होती थी और उम्‍मीद करनी होती थी कि उसका काम सरलता से हो जाए, वह अब अपनी पंचायत में एक सामान्य सेवा केंद्र से यह काम कर सकता है। हर महीने की बीस तारीख को सीएससी-सीपीजीआरएएमएस दिवस के रूप में निर्धारित किया जाता है ताकि यह वादा अंतिम मील तक पहुंच सके।

लेकिन वह गहरा परिवर्तन, जिसे मैं स्टील फ्रेम का सच्चा सुधार मानता हूं, वह डिजिटल प्लंबिंग नहीं है। यह इस दर्शन में बदलाव है कि हम अपने प्रशासनिक अधिकारियों का निर्माण कैसे करते हैं। 70 वर्षों तक, सरकार “नियम-आधारित” संस्कृति पर चलती रही: एक अधिकारी को इस बात से आंका जाता था कि क्या उसने सही प्रक्रिया का पालन किया था, न कि इस बात से कि उसने नागरिक की समस्या को हल किया है या नहीं। 2020 में, हमने मिशन कर्मयोगी लॉन्च किया, जो प्रशासनिक सेवा क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम है। हमने इस कार्यक्रम को इसी “भूमिका-आधारित” संस्कृति में परिवर्तित करने के लिए लॉन्‍च किया था,  जहां एक अधिकारी को इस आधार पर प्रशिक्षित और मूल्यांकन किया जाता है कि उसकी नौकरी वास्तव में उससे क्या मांग करती है, न कि औपनिवेशिक युग की नियम पुस्तिका में क्‍या वर्णन किया गया है। आज एक ग्राम-स्तरीय क्लर्क से लेकर भारत सरकार के सचिव तक 1.65 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी, आईजीओटी कर्मयोगी नामक एक सामान्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीखते हैं, जो अब हिंदी और सत्रह अन्य भारतीय भाषाओं में पांच हजार से अधिक पाठ्यक्रम संचालित करता है। पहली बार, हमने औपचारिक रूप से इस सीखने को एक अधिकारी की पदोन्‍नति के लिए आवश्‍यक वार्षिक मूल्‍यांकन अर्थात्  निष्‍पादन मूल्यांकन रिपोर्ट से जोड़ा है। अब निरंतर सीखना एक गुण नहीं रह गया, जिसका कोई अच्‍छा अधिकारी अभ्यास करता है, बल्कि इसे सीधे उसके करियर से जुड़ा हुआ एक मापतंत्र (मेट्रिक) बना दिया गया है। यह निष्‍पादन जवाबदेही है, एक नारे के रूप में नहीं बल्कि एक तंत्र के रूप में।

हमने अधिकारियों की भर्ती और प्रशिक्षण के तरीके से औपनिवेशिक अवशेषों को हटाने के लिए चुपचाप लेकिन लगातार काम किया है। 2016 के बाद से, निचले और मध्यम स्तर की सरकारी नौकरियों, ग्रुप सी और अराजपत्रित ग्रुप बी पदों के लिए साक्षात्कार, जिन पदों पर पारंपरिक रूप से एक साक्षात्कार का मतलब पक्षपात होता था और अक्सर रिश्वत दी जाती थी, को केंद्र सरकार के कार्यालयों में समाप्त कर दिया गया है। 24 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों ने भी इसका अनुसरण किया है। हमने पुरानी आवश्यकता को खत्‍म कर दिया कि एक उम्मीदवार को एक सरकारी फॉर्म भरने के लिए भरोसा करने से पहले एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित और पुष्टि की जाए। यह एक औपनिवेशिक युग की प्रथा थी जो हर नागरिक को जालसाजी का दोषी मानती थी जब तक कि अन्यथा साबित न हो जाए। हम नौकरशाही औपचारिकता के लिए महीनों इंतजार करवाने के बजाय सफल उम्मीदवारों को पुलिस सत्यापन होने तक अस्थायी रूप से अपनी नई नौकरियों में शामिल होने देते हैं। हमने 1600 से अधिक अप्रचलित कानूनों को निरस्त कर दिया है, जिनका उद्देश्य केवल हमें यह याद दिलाना था कि हम पर पहले किसने शासन किया था। आज जब मैं युवा अधिकारियों से मिलता हूं, तो मैं उन्हें स्पष्ट रूप से बताता हूं कि मैंने इस साल की शुरुआत में उनसे क्‍या कहा था: कि अभी भी दिमाग में सबसे बड़ा सुधार करने की आवश्‍यकता यह है कि अपनी “औपनिवेशिक मानसिकता” को दूर किया जाए। जब प्रधानमंत्री ने हमारे मंत्रालय को नॉर्थ ब्लॉक, जिसका हर पत्‍थर किसी साम्राज्‍य पर शासन के लिए बिछाया गया था, से बाहर कर्तव्‍य भवन में स्‍थानांतरित किया, तो यह केवल पते में बदलाव नहीं था। यह एक वक्‍तव्‍य था कि भारत का कामकाजी शब्‍द कर्तव्य होना चाहिए, न कि नियंत्रण।

इस सब के साथ-साथ एक शांत सुधार चल रहा है, जिसका उद्देश्य कार्यालय के बाहर के नागरिक के लिए नहीं बल्कि उन महिलाओं पर है जो कार्यालय को भीतर से चलाती हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास के अधिकांश समय में, सरकारी सेवारत महिलाओं को जन्म के समय अपने एक बच्चे को खो देने पर शोक मनाने के लिए कोई औपचारिक छुट्टी नहीं थी; आज वह साठ दिनों के विशेष मातृत्व अवकाश की हकदार है। यह एक ऐसी पात्रता है, जिसे हमने 2022 में प्रदान किया था। इसे मैं केवल करुणा की एक अतिदेय भावना कह सकता हूं, जिसे हमने तब से उन सभी माताओं को उपलब्‍ध कराया है जो सरोगेसी के माध्यम से भी अपने परिवार की देखरेख करती हैं। हम चाइल्ड केयर लीव की सुविधा का लाभ महिलाओं की हर पोस्टिंग तक उपलब्‍ध कराते हैं। यहां तक कि सरकार उसे विदेश यात्रा के लिए भी इसका उपयोग करने की अनुमति देती है। एक सिंगल मदर को एक कैलेंडर वर्ष में इसके छह अवसर देते हैं, जबकि दूसरों को केवल तीन की ही अनुमति दी जाती है। जो महिला जो अपने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट करने का साहस करती है, वह अब नब्बे दिनों की छुट्टी की हकदार है, जबकि उसकी शिकायत की जांच अपना काम करती है, यह छुट्टी उसके अपने खाते से नहीं काटी जाती है। दिव्‍यांग महिला अधिकारियों को नवजात शिशु की परवरिश में मदद करने के लिए मासिक भत्ता मिलता है। सरकारी कर्मचारी के दिव्यांग बच्चे के लिए शिक्षा भत्ता दोगुना कर दिया गया है। इनमें से कुछ भी जीडीपी चार्ट में दिखाई नहीं देगा, लेकिन यह इस बात में दिखाई देता है कि क्या एक महिला अब सरकारी सेवा में बने रहने का विकल्प चुनती है जिससे वे एक लंबे समय तक चुपचाप बाहर रही थी। यह भी कि सिविल सेवा ईमानदारी से कह सकती है कि वह जेंडर समानता का वास्‍तव में अनुपालन करती है, न कि केवल साल में एक बार बैनर पर प्रदशित करती है।

बेशक, इनमें से कोई भी मायने नहीं रखता है, जब तक कि एक आम नागरिक के जीवन में कुछ न बदले, और ऐसा न हो। पिछले कुछ वर्षों में रोजगार मेलों के माध्यम से 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, जो संपर्क और प्रभाव के पुरान‍े रिवाज के बिना वितरित किए गए हैं। मसूरी में एक कॉमन फाउंडेशन कोर्स है, जहां एक आईएएस अधिकारी और एक आईपीएस अधिकारी अपने अलग-अलग संवादहीनता को बनाए रखने के बजाय कंधे से कंधा मिलाकर प्रशिक्षण लेते हैं, ताकि जब वे वर्षों बाद किसी नागरिक से मिलें, तो वे तीन प्रतिस्पर्धी विभागों के बजाय एक सरकार के रूप में कार्य करें। यह सुविधा अब एक पेंशनभोगी के पास है, जो अब बैंक की कतार में खड़े होने के बजाय अपने घर से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बना सकती है। एक युवा आकांक्षी छात्र के पास जो हर परीक्षा के लिए एक ही फॉर्म भरने के बजाय यूपीएससी पोर्टल पर एक बार पंजीकरण करता है। सरकारी सेवा में ओबीसी प्रतिनिधित्व 2014 से 19 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत हो गया है। अंग्रेजों ने हमें जो स्टील फ्रेम छोड़ा था, वह कभी भी रातोंरात नष्ट नहीं होने वाला था, और न ही होना चाहिए; संस्थाएं स्मृति को संजोती हैं और स्मृति के अपने उपयोग होते हैं। इन 12 वर्षों में हमने इसका पुनर्निर्माण करने की कोशिश की है, चुपचाप, अलग-अलग सेवाओं के माध्‍यम से, अलग-अलग नियमों के माध्‍यम से, ताकि जिस ढांचे ने कभी एक साम्राज्य को संभाला था, वही अब उस व्यवस्था को सहारा दे सके, जिसका वादा हमारे संविधान ने वास्तव में अपने लोगों से किया था: ऐसी सरकार जो शासन करने के बजाय सेवा करे और केवल प्रशासन करने के बजाय जनता के प्रति उत्‍तरदायी हो।

  • लेखक : डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री हैं
https://liveskgnews.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1-1.mp4
https://liveskgnews.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Video-2025-09-15-at-11.50.09-PM.mp4

हाल के पोस्ट

  • पौड़ी की श्री तिमली हैंडलूम्स बनी महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हुनर की नई पहचान
  • मुगालते में राष्ट्रीय दल, यूकेडी की वापसी ने बढ़ाई चिंता
  • रेडक्रॉस ने आपदा प्रभावित 10 परिवारों को बांटी राहत सामग्री
  • कोटद्वार : मुख्यमंत्री उदयीमान खिलाड़ी योजना में दीपिका ने जनपद में किया टॉप, श्रुति ने जीता कांस्य पदक
  • सहस्त्रधारा में स्नान के दौरान डूबे व्यक्ति का शव दो किलोमीटर दूर मिला, SDRF ने चलाया सर्च अभियान
  • सोनगाड के पास ब्रेक फेल होने से टेंपो ट्रेवल्स पलटा, 17 यात्री थे सवार
  • पुलिसकर्मियों पर हमला, आंखों में मिर्च पाउडर डालकर लाठी-डंडों से पीटा
  • आईटी पार्क क्षेत्र में जलभराव का होगा स्थायी समाधान, सितंबर में पूरा होगा विस्तृत सर्वेक्षण
  • पहाड़ की बेटियों के हुनर को मिला बाजार, श्री तिमली हैंडलूम्स बन रहा महिला सशक्तिकरण की मिसाल
  • मुख्यमंत्री धामी ने सुनी नई पीढ़ी की आवाज, 3 लाख विद्यार्थियों से संवाद कर पूछा-कैसा हो आपके सपनों का उत्तराखंड
liveskgnews

सेमन्या कण्वघाटी हिन्दी पाक्षिक समाचार पत्र – www.liveskgnews.com

Follow Us

  • Advertise with us
  • Contact Us
  • Donate
  • Ourteam
  • About Us
  • E-Paper
  • Video

© 2017 Maintained By liveskgnews.

No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स

© 2017 Maintained By liveskgnews.