गुरूवार, जुलाई 23, 2026
  • Advertise with us
  • Contact Us
  • Donate
  • Ourteam
  • About Us
  • E-Paper
  • Video
liveskgnews
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स
No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स
No Result
View All Result
liveskgnews
23rd जुलाई 2026
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स

हत्या ‘जघन्य अपराध’ की श्रेणी में, किशोरों पर भी वयस्क की तरह चलेगा मुकदमा : सुप्रीम कोर्ट

शेयर करें !
posted on : जुलाई 23, 2026 7:27 अपराह्न

नई दिल्ली। किशोर अपराधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 302, जो अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) है, के तहत हत्या का अपराध किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत “जघन्य अपराध” (Heinous Offence) की श्रेणी में ही आएगा। कोर्ट ने कहा कि हत्या के मामले में आजीवन कारावास निहित न्यूनतम सजा है, भले ही कानून में यह स्पष्ट शब्दों में न लिखा गया हो।

बिहार मामले में क्या हुआ फैसला

यह फैसला न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने बिहार के एक हत्या मामले की सुनवाई करते हुए दिया। इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि हत्या के आरोपी किशोर पर बाल न्यायालय (Children’s Court) में वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जाए। आरोपी ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 3 बड़े निष्कर्ष

1. हत्या जघन्य अपराध है: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 302/103 के तहत हत्या का अपराध जघन्य अपराध है, क्योंकि इसके लिए न्यूनतम सजा आजीवन कारावास है।

2. विशेषज्ञों की राय अनिवार्य नहीं: कोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 101(2) के तहत अपील पर सुनवाई के दौरान मनोवैज्ञानिक या चिकित्सा विशेषज्ञों की मदद लेना अदालत का विवेकाधिकार है, यह कोई अनिवार्य प्रक्रिया नहीं है।

3. जुवेनाइल बोर्ड की जिम्मेदारी: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को धारा 15 के तहत प्रारंभिक जांच में मामले के सभी जरूरी पहलुओं पर स्वयं विचार और मूल्यांकन करना चाहिए।

https://liveskgnews.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1-1.mp4
https://liveskgnews.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Video-2025-09-15-at-11.50.09-PM.mp4

हाल के पोस्ट

  • नकली दवाओं के खिलाफ विभाग की बड़ी कार्रवाई, ईस्ट होप टाउन क्षेत्र से बड़ी मात्रा में नकली दवाएं एवं उनके निर्माण व पैकिंग में प्रयुक्त उपकरण किए गए बरामद
  • UKSSSC की पटवारी-लेखपाल शारीरिक परीक्षा 6 अगस्त से, औपबंधिक सूची जारी
  • पत्रकार कल्याण कोष से 9 आश्रितों को पांच-पांच लाख की सहायता, तीन वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन की संस्तुति
  • उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में 379 पदों पर भर्ती, 26 जुलाई से आवेदन शुरू
  • कोटद्वार पुलिस की अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, खोह नदी से खनन सामग्री लाते ट्रैक्टर को किया सीज
  • कोटद्वार : बाल श्रम कराना पड़ा भारी, प्रतिष्ठान संचालक का चालान
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का शुभारंभ
  • सहकारी समिति में लाखों के गबन का आरोपी श्रीनगर से दबोचा
  • मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के दूसरे चरण का शुभारंभ
  • चमोली की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारो, वरना होगा आंदोलन – यूकेडी
liveskgnews

सेमन्या कण्वघाटी हिन्दी पाक्षिक समाचार पत्र – www.liveskgnews.com

Follow Us

  • Advertise with us
  • Contact Us
  • Donate
  • Ourteam
  • About Us
  • E-Paper
  • Video

© 2017 Maintained By liveskgnews.

No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तरप्रदेश
  • राष्ट्रीय
  • धर्म
  • रोजगार न्यूज़
  • रोचक
  • विशेष
  • साक्षात्कार
  • सम्पादकीय
  • चुनाव
  • मनोरंजन
  • ऑटो-गैजेट्स

© 2017 Maintained By liveskgnews.