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देश में भीषण गर्मी का कहर, ‘सुपर एल-नीनो’ से मानसून और खेती पर संकट के आसार

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posted on : मई 21, 2026 3:23 अपराह्न

देश के अधिकांश हिस्से इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। कई राज्यों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के बड़े हिस्से में लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में राहत की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहा “सुपर एल-नीनो” आने वाले महीनों में दुनिया भर के मौसम को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इसका असर भारत पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि एल-नीनो का सीधा संबंध दक्षिण-पश्चिम मानसून से माना जाता है।

कई शहरों में पारा 47 डिग्री के पार

बुधवार को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। वहीं अहमदाबाद और नागपुर जैसे शहरों में तापमान 41 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार दूसरे दिन तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से अधिक रिकॉर्ड किया गया। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भी तेज गर्मी और लू का असर देखने को मिल रहा है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने देश के कई हिस्सों में लू और भीषण लू चलने की चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय से शुष्क मौसम, बादलों की कमी और तेज धूप के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है।

क्या है एल-नीनो?

एल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो तब बनती है जब पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। समुद्र के पानी में असामान्य गर्मी आने से वैश्विक पवन प्रणाली प्रभावित होती है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एल-नीनो के प्रभाव से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे वर्षा में कमी और सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बढ़ जाती है। यह घटना सामान्यतः हर दो से सात वर्ष में होती है और करीब एक वर्ष तक बनी रह सकती है।

150 साल का रिकॉर्ड टूटने की आशंका

मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार बनने वाला “सुपर एल-नीनो” वर्ष 1877 की ऐतिहासिक घटना से भी अधिक प्रभावशाली हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब समुद्र की सतह का औसत तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ जाता है तो उसे “सुपर एल-नीनो” कहा जाता है।

ताजा अनुमान बताते हैं कि इस बार समुद्र के तापमान में वृद्धि तीन डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकती है, जो अब तक के रिकॉर्ड स्तर को पार कर सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा, बाढ़ और मौसम संबंधी आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।

शहर बन रहे तपते द्वीप

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी के पीछे स्थानीय कारण भी जिम्मेदार हैं। बड़े शहरों में कंक्रीट का अत्यधिक फैलाव, वाहनों से निकलने वाला धुआं, कारखानों की गर्मी और शीतलन यंत्रों से निकलने वाली गर्म हवा शहरों को “तपते द्वीप” में बदल रही है। इसके कारण शहरी क्षेत्रों में तापमान ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक दर्ज किया जा रहा है।

मानसून और खेती पर मंडरा रहा संकट

दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। यदि एल-नीनो मजबूत होता है तो इसका सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून कमजोर पड़ने से खरीफ फसलों पर बड़ा असर पड़ सकता है, क्योंकि देश के लगभग 60 प्रतिशत किसान वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं। उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में सूखे जैसे हालात बनने की आशंका जताई जा रही है, जबकि कुछ तटीय इलाकों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है।

भारी आर्थिक नुकसान की आशंका

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे पहले आए बड़े एल-नीनो घटनाक्रमों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया था। वर्ष 1982-83 और 1997-98 के एल-नीनो के दौरान दुनिया भर में खरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ था। ऐसे में वैज्ञानिक इस बार भी कृषि, जल संसाधन, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जता रहे हैं।

 
 
 
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