बिहार ब्यूरो
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने वर्ष 2006 से नगर निकाय एवं पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। ऐसा करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना। कुछ लोग इसको लेकर मेरे खिलाफ रहे। इससे बड़ी संख्या में महिलाएं चुनाव जीतकर आयीं। पुलिस एवं सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया। इसका नतीजा है कि आज बिहार पुलिस में 25 हजार से ज्यादा महिलाएं हैं।
स्वयं सहायता समूह की संख्या बिहार में न के बराबर थी, हमलोगों ने विश्व बैंक से कर्ज लेकर इस काम को आगे बढ़ाया। हमने इसका नामकरण जीविका किया। हमलोगों ने 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था और अब तक 10 लाख 28 हजार स्वयं सहायता समूहों को गठित किया जा चुका है जिनसे 1 करोड़ 27 लाख से परिवार जुड़ गया है। उस समय की सरकार ने जीविका का अध्ययन किया और इसे पूरे देश में आजीविका के नाम से यह योजना चलायी। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति, अति पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई काम किए गए। उन्होंने कहा कि अब मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी एक तिहाई सीट लड़कियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा सड़क, स्वास्थ्य, पुल-पुलिया, महिलाओं के उत्थान काम किया है। हर घर तक पक्की गली-नाली का निर्माण कराया। हर घर नल का जल पहुंचाने का काम किया। हर घर में शौचालय का निर्माण कराया गया। हर घर तक बिजली पहुंचाई गई। हमलोग वर्ष 2005 से न्याय के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में बाल विवाह और दहेज प्रथा को रोकने के लिए कानून बना हुआ है। इसके बावजूद यह कुप्रथा आज भी देखने को मिल जाती है। लोग लड़के की शादी में दहेज मांगते हैं बहुत बुरी चीज है। समाज में अगर पुरुष – स्त्री नहीं रहते तो हम सबका अस्तित्व नहींरहता। समाज को आगे बढ़ाने में महिलाओं की बड़ी भूमिका है। लड़की नहीं होगी तो लड़के की शादी आप किससे करेंगे। इसलिए दहेज प्रथा के खिलाफ निरंतर अभियान चलाते रहिए। दहेज मुक्त शादी समारोह में ही हमने जाने का निर्णय लिया है। शादी के कार्ड पर दहेज मुक्त शादी की बात लिखी जायेगी तो ही हम उस शादी समारोह में जायेंगे। आप सब भी ऐसा ही करें। उन्होंने कहा कि बाल विवाह से अनेक प्रकार की बीमारियां होती है। केंद्र सरकार का प्रस्ताव आया है कि लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार में प्रजनन दर 4.3 था जो घटकर अब 3 हो गया है। हमलोग इसके लिए लड़कियों को शिक्षित कर रहे हैं। लड़कियां पढ़ेंगी तो प्रजनन दर में और कमी आएगी। बिहार का क्षेत्रफल कम है, जनसंख्या का घनत्व अधिक है, इसलिए हमलोगों को प्रजनन दर घटाना है। उन्होंने कहा कि ताड़ी की जगह नीरा के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम करें। सतत् जीविकोपार्जन योजना के तहत 1 लाख रूपये तक की इसमें मदद की जा रही है। इससे लोगों की आमदनी भी बढ़ेगी और रोजगार भी बढ़ेगा। प्रेम और भाईचारा के साथ हमलोग मिलकर आगे बढ़ते रहें। आप आगे बढ़ेंगे तो राज्य बढ़ेगा, देश बढ़ेगा।
कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत जीविका समूह की दीदियों ने शराबबंदी, बाल विवाह एवं दहेज प्रथा मुक्त समाज बनाने के साथ ही समाज सुधार अभियान के प्रति अपनी-अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। मुख्यमंत्री द्वारा विकास कार्यों के साथ-साथ चलाए जा रहे समाज सुधार अभियान की सराहना करते हुए श्रीमती बबली कुमारी, श्रीमती शाहीन परवीन, श्रीमती ममता देवी, श्रीमती नेहा देवी, श्रीमती सविता देवी एवं श्रीमती माधुरी देवी ने अपनी आपबीती और अनुभवों को साझा किया।
पटना जिले के नेउरा की रहनेवाली श्रीमती बबली कुमारी ने बताया कि जब मैं छोटी थी तभी मेरे पिता का देहांत हो गया। पैसे के अभाव में गरीब परिवार में शादी हो गई। मेरे 9वीं पास पति पटना में मजदूरी करते थे उन्हें 2000 रुपये मिलता था। मेरे तीन बच्चे हैं। मैं जबसे जीविका समूह से जुड़ी और मुझे काफी मदद मिली। अब घर पर हमलोग दुकान चलाते हैं और उससे 10 से 15 हजार की आमदनी हो रही है। मुझे कांति दीदी ने एक बार कहा कि मैं गरीब हूं और मुझे पांच बेटियां हैं कैसे शादी करुं। लड़की को एक परिवार ने देखा उसके बाद उनको मुखिया जी के पास ले गए जहां उन्होंने सहायता की और बिना दहेज की शादी हुई। बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ लोगों को जागरुक कर रहे हैं तथा प्रेरित कर रहे हैं।
नालंदा के अस्थावां प्रखंड के जंगीपुर की रहने वाली श्रीमती शाहिन परवीन ने बताया कि मेरे पति की मृत्यु के बाद अपने चार बच्चों की जिम्मेवारी मेरे ऊपर थी। मैं 2017 में जीविका से जुड़कर काम करने लगी। मुझे तीन बेटी और एक बेटा है। सभी की पढ़ाई चल रही है। मुख्यमंत्री जी जब महिलाओं के सपोर्ट में हैं तो हमलोगों की किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है। मुख्यमंत्री जी के उद्देश्य को हमलोग मिलकर पूरा करेंगे, जिससे बिहार आगे बढ़ेगा। मैं तो सभी को जीविका से जुड़ने का आह्वान करती हूं। जीविका से जुड़कर हमारे गॉव की सभी महिलायें स्वावलंबी बन गयी है। हमारे गांव में एक भी गरीब महिला नहीं हैं।
पटना जिले के फुलवारी प्रखंड के कुरथौल की रहने वाली श्रीमती ममता देवी का परिवार पहले जीविकोपार्जन के लिए ताड़ी का व्यवसाय करता था। 2016 में नशाबंदी अभियान से मेरा व्यवसाय प्रभावित हुआ। उसके बाद 2018 में जीविका समुदाय से जुड़ गई। वर्ष 2020 में सतत जीविकोपार्जन से मुझे आर्थिक सहायता मिली। ताड़ी का व्यवसाय छूट गया और आज श्रृंगार की दुकान चला रही हूं और बाद में बकरी पालन का काम शुरु किया।आज की तारीख में 10 से 12 हजार तक की आमदनी हो रही है। मेरा पूरा परिवार आज खुश हैं। इस खुशी के लिए मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देती हूं कि आपने ताड़ी का व्यवसाय को बंद कराया। अब मुझे ताड़ी वाली नहीं बल्कि श्रृंगार वाली दीदी कहकर सम्मान मिलता
पटना जिले के मनेर प्रखंड की नगमा गाँव की रहनेवाली श्रीमती नेहा देवी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि मैं आर्थिक तंगी से परेशान थी। आगे चलकर जीविका समूह से जुड़ी उसके बाद मुर्गी पालन, बकरी पालन किया तथा सब्जी का व्यवसाय करना शुरू किया जिसका नतीजा है कि हमारी आर्थिक समस्या दूर हो रही है। एक दीदी हमारे पास आयी और बोली कि मेरे पति शराब पीते हैं पूरे परिवार की स्थिति खराब है। बच्चे पढ़ नहीं पाते हैं। इस बात को हमलोगों ने संगठन में अपनी बात रखी। उनके घर जाकर समझाया शराब बुरी चीज है, इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रहा है। उसके बाद शराब भट्ठी पर जाकर हमलोगों ने उनको मना किया कि आप हमारे गांव के लोगों को शराब मत बेचिए। भट्ठी पर जाकर सारे सामान को हमलोगों ने नष्ट कर दिया और हमारे गाँव के लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया और गाँव में शराब बिकना भी बंद हो गया। मैं मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देती हूँ कि वे राज्य का विकास करने के साथ-साथ शराबमुक्त बिहार बनाने के लिये प्रयासरत हैं। हम सब दीदी उनके साथ हैं।
नालंदा जिले के गिरियक प्रखंड के दुर्गापुर की रहनेवाली सविता दीदी ने बताया कि वो ताड़ी का व्यवसाय करती थी। एक दिन ताड़ के पेड़ से फिसल जाने से मेरे पति का कमर और पैर खराब हो गया। बहुत पैसा खर्च करके इलाज कराया लेकिन उनका निधन हो गया एक बच्चा था उसके लिए ताड़ी बेचने का काम करने लगी। कुछ दिनों के बाद जीविका समूह से जुड़ी उसके बाद दीदी की बात मानकर सतत जीविकोपार्जन के तहत मनिहारी की दुकान खोली। उसके बाद अंडा दुकान खोली। बकरी पालन, मुर्गी पालन भी करने लगी। स्थिति में सुधार हुआ और 10 से 12 हजार की आमदनी हमारी हो रही है। मैं मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देती हूँ कि मेरा परिवार आज सुखमय जीवन जी रहा है।
नालंदा जिले के हरनौत प्रखण्ड के मोहनखंदा गॉव की रहने वाली श्रीमती माधुरी देवी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि मेरा अतीत बहुत बुरा था लेकिन जीविका समूह से जुड़ने के बाद बदलाव हुआ। मेरी शादी में पैसा नहीं दिए जाने के कारण मेरे घर पर बारात नहीं आयी। मेरे मामा और फूफा ने पैसा दिया और उसके बाद दूसरे दिन मेरी शादी हुयी। मुझे ससुराल में दहेज के कारण प्रताड़ना होने लगा लेकिन हमने इसका सामना किया। मेरे पति कुछ दिनों के बाद दोनों पैर से लाचार हो गए। बाद में कोई काम कर पाने में असमर्थ हो गए। पति के इलाज के लिए 6 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज लेकर कराया। कर्ज से पूरी तरह से दब गई। मगर जीविका समूह से 2011 में जुड़कर जीवन में ब बड़ा परिवर्तन आया। वर्ष 2018 में दहेज प्रथा के खिलाफ मुख्यमंत्री जी का अभियान चला। अगर यह अभियान मेरे शादी के समय चला होता तो मैं दोषियों को जेल भेजवा देती। दहेज एक अभिशाप है, दो परिवारों के खिलनेवाले फूलों को यह नष्ट कर देता है। मैं सात परिवारों के साथ रहती हूं। बेटी को पढ़ा रही हूं वो खुद ही सशक्त हो जाएंगी। आज खुशहाली की जिंदगी जी रही हूं।
कार्यक्रम में शामिल होने के पूर्व मुख्यमंत्री ने बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के पूर्व महिला हेल्पलाइन सह वन स्टॉप सेंटर, नीरा उत्पाद एवं अन्य प्रदर्शनियों का मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। कार्यक्रम के दौरान आयुक्त पटना प्रमंडल श्री कुमार रवि ने मुख्यमंत्री को पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों द्वारा दहेज उन्मूलन एवं नशामुक्त समाज पर आधारित गीत को प्रस्तुत किया गया तथा सतत् जीविकोपार्जन योजना पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को लाभान्वित किया। सतत् जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत 3379 हितग्राहियों को 5.03 करोड़ रुपये का डमी चेक एवं विभिन्न बैंको के माध्यम से स्वयं सहायता समूह को कैश क्रेडिट लिमिट के तहत 202.5 करोड़ रूपये का डमी चेक प्रदान किया।
कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री सह पटना जिला के प्रभारी मंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद, शिक्षा मंत्री सह नालंदा जिला के प्रभारी मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार मुख्य सचिव श्री आमिर सुबहानी पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, अपर मुख्य सचिव गृह सह सामान्य प्रशासन श्री चैतन्य प्रसाद, अपर मुख्य सचिव मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन श्री के०के० पाठक, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सह अपर मुख्य सचिव वित्त सह पटना जिला के प्रभारी सचिव श्री एस० सिद्धार्थ तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव सह नालंदा जिला के प्रभारी सचिव श्री अनुपम कुमार ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर विधान पार्षद श्री नीरज कुमार, विधान पार्षद श्री संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, विधायक श्री कौशल किशोर, सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार पटना प्रमंडल के आयुक्त श्री कुमार रवि, जीविका के कार्यपालक पदाधिकारी श्री बाला मुरुगन डी०, पुलिस महानिरीक्षक, पटना प्रक्षेत्र श्री राठी मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, जिलाधिकारी पटना डॉ. चंद्र सिंह, जिलाधिकारी नालंदा शशांक शुभंकर, वरीय पुलिस अधीक्षक पटना श्री मानव सिंह ढिल्लो, पुलिस अधीक्षक नालंदा श्री अशोक मिश्रा सहित अन्य वरीय पदाधिकारी, जीवि.. दीदियां एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



