कोटद्वार । राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा की राष्ट्र कार्यकारिणी के देश के सभी राज्यो के साथ बी0पी0 रावत राष्ट्रीय अध्यक्ष की अध्यक्षता में ऑनलाइन बैठक हुई । बैठक में सर्वप्रथम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया गया जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानपूर्वक जीने का हक है पेंशन, इससे वंचित नहीं किया जा सकता । सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश के सभी अधिकारी/शिक्षक और कर्मचारियों में खुशी की लहर है । अब केंद्र और राज्य सरकारों से अनुरोध किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन को सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार माना है। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि पेंशन सेवानिवृत्ति के बाद की अवधि के लिए सहायता है न कि इच्छा होने पर कोई कृपा। यह कर्मचारी के लिए सेवानिवृत्ति के बाद सम्मान बनाए रखने के अधिकार के तौर पर किया गया एक सामाजिक कल्याण उपाय है। केरल के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन में विसंगति दूर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा, पेंशन सुविधा सरकारी कर्मचारी को ढलती उम्र में सम्मान के साथ जीने के लिए है और इसलिए किसी कर्मचारी को इस लाभ से अकारण वंचित नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा है कि इसमें किसी भी नियम आदि का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए। कर्मचारी का पक्ष लेते हुए जस्टिस एसके कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने केरल सरकार को पेंशन लाभ का निर्धारण करने में अनुबंधित कामगार के रूप में दी गई उसकी सेवा अवधि को भी शामिल करने का आदेश दिया। कर्मचारी ने दावा किया था कि सरकारी विभाग में 32 साल तक काम करने के बावजूद उसे अंतिम 13 साल के लिए ही पात्र माना गया है। सुनवाई कर रही पीठ में जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस अनुरुद्ध बोस भी शामिल थे। पीठ ने ब्याज के साथ पेंशन का बकाया आठ सप्ताह में भुगतान करने का आदेश दिया है।
पुरानी पेंशन योजना से कर्मचारी का सेवानिवृत्त के बाद बुढ़ापे का जीवन सरलता से गुजर जाता है, एनपीएस को सरकारों द्वारा 2004 के बाद लागू किया गया है जो कि मात्र बाजारीकरण पर निर्भर है और एनपीएस का पैसा शेयर मार्किटो में सरकारों द्वारा लगाया जा रहा है जो कि कर्मचारियों के साथ मात्र एक छलावा है। पुरानी पेंशन योजना के तहत कर्मचारी अपनी जमा धनराशि में से जीपीएफ भी निकाल सकता था परन्तु एनपीएस में निकालने की कोई स्प्ष्ट व्यवस्ता नही है और अभी तक जो भी कर्मचारी एनपीएस से आच्छादित थे और सेवानिवृत्त हो रहे है उनको पेंशन के नाम पर 800 से अधिकतम 1300 तक ही पेंशन मिल रही है जो कि एनपीएस कर्मचारियों के लिए धोखे से बड़ा कुछ नही है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के बैनर तले देश मे 60 लाख कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली हेतु निरन्तर प्रयासरत है और इस जायज मांग के लिए कई आंदोलन भी कर चुके है।
मोर्चे ने कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान एक दीपक पेंशन के नाम, एक पौधा पेंशन के नाम, पोस्टरों,ट्वीटर एवम अन्य विभिन्न कार्यक्रमो के द्वारा पुरानी पेंशन बहाली की आवाज उठाई है और इसी क्रम में ऑनलाइन बैठक में निर्णय लिया गया कि 13 सितंबर 2020 को परिवार सहित उपवास रखा जाएगा एवं एवम् सायं 3 बजे से 6 बजे तक ट्वीटर पर पुरानी पेंशन बहाल करो के स्लोगन लिखकर प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री भारत सरकार एवम अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्री को टेग किया जाएगा।13 सितंबर 2020 के अनशन कार्यक्रम में भागीदारी हेतु देश के अधिकारी, शिक्षक, रेलवे कर्मी, पुलिस कर्मी, सफाई कर्मी, बैंक कर्मी, एवं समस्त कार्मिको से अपील की गई है । राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली सयुंक्त मोर्चे की राष्ट्रीय बैठक में राष्ट्रीय मुख्य सलाहकार अनिल स्वदेशी, दिल्ली विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय आईटी सेल प्रभारी मिलेंद्र बिष्ट, संजय शर्मा, बीरेंद्र दुबे छतीसगढ, प्रवीण हिमाचल प्रदेश, एलडी चौहान, गुलजबेर डे, जम्मू कश्मीर, भूपेंद्र, जसवीर तलवाड़ा पंजाब, आलोक चन्द्र प्रकाश, डॉ पंकज गुजरात, सियाराम पटेल मध्यप्रदेश, अनिल बडोनी उत्तराखण्ड आदि पदधिकारियों ने बैठक में शिरकत की। अंत मे बैठक में उपस्थित सभी साथियों से अनुरोध किया गया कि राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के एक मात्र उद्देश्य पुरानी पेंशन बहाली तक संगठन को मजबूती प्रदान करने हेतु सभी पदाधिकारी अपने-अपने राज्यो में मजबूती से कार्य करे।




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