देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और अकादमिक रूप से मजबूत बनाने के लिए एससीईआरटी के अध्यक्ष विनय थपलियाल ने SCERT और DIET के लिए एकीकृत एवं विशेषज्ञता आधारित अकादमिक ढांचा विकसित करने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने रविदर्शन तोपाल के साथ कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मंत्री से आग्रह किया कि ज्ञापन को मुख्यमंत्री तक पहुंचाकर इस विषय में वार्ता का अवसर उपलब्ध कराया जाए।
विनय थपलियाल का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप राज्य में शिक्षक शिक्षा के लिए अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों और कैडर के बजाय एक सुसंगत Single Teacher Education Academic Structure विकसित किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जब SCERT और DIET एक ही व्यापक शिक्षक-शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं और संबंधित निदेशालय का नेतृत्व भी एक ही निदेशक के अधीन है, तो दोनों के लिए अलग-अलग ढांचे और कैडर बनाने के औचित्य पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
अलग-अलग कैडर से अकादमिक समन्वय प्रभावित होने की आशंका
थपलियाल ने कहा कि SCERT और DIET को अलग-अलग कैडर में बांटने से भविष्य में शैक्षिक एवं संवैधानिक स्तर पर विसंगतियां पैदा हो सकती हैं। इससे दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक समन्वय भी प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि शिक्षक शिक्षा, प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या निर्माण, मूल्यांकन, शोध और शैक्षिक नवाचार जैसे कार्यों के लिए सामान्य प्रशासनिक ढांचे से अलग विशिष्ट अकादमिक विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
उन्होंने NEP 2020 का हवाला देते हुए कहा कि DIET को DIETs of Excellence के रूप में विकसित करने तथा SCERT और DIET को उच्च स्तरीय अकादमिक, प्रशिक्षण एवं शोध संस्थानों के रूप में मजबूत करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
SCF-TE लागू होने के बाद तय हो अंतिम ढांचा
विनय थपलियाल ने मांग की कि राज्य में State Curriculum Framework for Teacher Education (SCF-TE) लागू किए जाने के बाद ही SCERT-DIET के संगठनात्मक एवं कैडर ढांचे का अंतिम निर्धारण किया जाए। उनका कहना है कि जल्दबाजी में प्रशासनिक ढांचा तैयार करने के बजाय पहले शिक्षक शिक्षा, प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या, शोध, मूल्यांकन, डिजिटल शिक्षा और नवाचार से संबंधित भूमिकाओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने भविष्य की व्यवस्था में Dedicated Teacher Education Cadre की अवधारणा को महत्व देने की मांग की। उनके अनुसार शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षाशास्त्र से जुड़े विशेषज्ञों को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप जिम्मेदारी मिलने से शिक्षक शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकती है।
लगातार तबादलों से अकादमिक निरंतरता पर असर
SCERT में लगातार होने वाले तबादलों पर भी थपलियाल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय अकादमिक संस्थान में बार-बार अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के स्थानांतरण से संस्थागत निरंतरता प्रभावित होने की आशंका रहती है। इससे लंबे समय की अकादमिक योजनाओं, शोध कार्यों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संस्थागत विशेषज्ञता को नुकसान पहुंच सकता है।
उन्होंने SCERT में पूर्व में अपनाई जा रही तबादला व्यवस्था को स्थगित करने तथा विशेषज्ञता आधारित स्थायी अकादमिक व्यवस्था विकसित करने की मांग की। उनका कहना है कि SCERT की फैकल्टी और शिक्षक-शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों को उनकी योग्यता एवं अनुभव के अनुरूप काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
एलटी शिक्षकों के TET पर पुनर्विचार की मांग
एलटी ग्रेड शिक्षकों के लिए TET संबंधी कार्रवाई को लेकर भी विनय थपलियाल ने सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षक पात्रता से संबंधित न्यायिक आदेशों की ऐसी व्याख्या नहीं होनी चाहिए, जिससे माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत एलटी शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित हो।
उन्होंने कहा कि TET का मूल वैधानिक संदर्भ RTE के तहत कक्षा 1 से 8 तक की elementary education से जुड़ा है। हालांकि, इन-service शिक्षकों की TET पात्रता को लेकर न्यायिक स्थिति व्यापक है और 29 मई 2026 के निर्णय में TET प्राप्त करने की समयसीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई गई है। ऐसे में एलटी कैडर पर इसके अनुप्रयोग का अंतिम निर्धारण सेवा नियमों और न्यायिक आदेशों के सम्यक परीक्षण के बाद ही किया जाना चाहिए।
एलटी शिक्षकों का मूल कैडर माध्यमिक शिक्षा के अधीन
थपलियाल के अनुसार एलटी ग्रेड शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा, स्थानांतरण और सेवानिवृत्ति संबंधी व्यवस्था माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन है। विद्यालयों में आवश्यकता और टाइम-टेबल के अनुसार एलटी तथा प्रवक्ता शिक्षकों से कक्षा 6 से 8 तक भी शिक्षण कार्य कराया जा सकता है, लेकिन इससे उनके मूल कैडर और नियुक्ति की प्रशासनिक प्रकृति स्वतः नहीं बदल जाती।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक एवं जूनियर स्तर की सेवा नियमावलियों और माध्यमिक एलटी कैडर की सेवा व्यवस्था को अलग-अलग संदर्भों में देखते हुए TET की आवश्यकता का निर्धारण किया जाना चाहिए। एलटी शिक्षकों को TET की अनिवार्यता में उलझाकर उनकी पदोन्नति बाधित करना उचित नहीं होगा। सरकार को आवश्यकता के अनुसार सेवा नियमावली में संशोधन कर इस विषय का स्थायी और स्पष्ट समाधान करना चाहिए।
DIET में विशेषज्ञता आधारित विंग विकसित करने की मांग
थपलियाल ने DIET को केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने वाले संस्थान के रूप में सीमित रखने के बजाय स्थानीय शैक्षिक समस्याओं के समाधान और विद्यालयों को अकादमिक सहयोग देने वाला संस्थान बनाने की आवश्यकता जताई। इसके लिए DIET में FLN, मूल्यांकन, डिजिटल शिक्षा, समावेशी शिक्षा, क्रियात्मक अनुसंधान और शैक्षिक नवाचार जैसे विशेषज्ञता आधारित विंग विकसित करने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि SCERT और DIET का मूल उद्देश्य शिक्षक शिक्षा, प्रशिक्षण, शोध, पाठ्यचर्या विकास, शैक्षिक नीति को अकादमिक आधार प्रदान करना और विद्यालयों को निरंतर शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराना है। इसलिए इन संस्थानों के शीर्ष एवं विशेषज्ञ पदों पर अकादमिक अनुभव और विशेषज्ञता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री से वार्ता का आश्वासन
कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने विनय थपलियाल की ओर से उठाए गए मुद्दों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने और मुख्यमंत्री से समय लेकर इस विषय पर वार्ता कराने का आश्वासन दिया। मंत्री के आश्वासन के बाद SCERT-DIET के एकल ढांचे, SCF-TE आधारित शिक्षक शिक्षा व्यवस्था, SCERT में अकादमिक निरंतरता और एलटी शिक्षकों के TET से जुड़े विषयों पर सरकार के स्तर पर निर्णय की उम्मीद जताई गई है।
यह हैं प्रमुख मांगें
विनय थपलियाल ने सरकार के समक्ष SCERT-DIET का एकल एवं विशेषज्ञता आधारित अकादमिक ढांचा विकसित करने, SCF-TE लागू होने के बाद अंतिम कैडर संरचना तय करने, Dedicated Teacher Education Cadre की दिशा में आगे बढ़ने और SCERT में अनावश्यक एवं लगातार तबादलों पर रोक लगाने की मांग की है।
इसके साथ ही SCERT की मौजूदा फैकल्टी एवं विशेषज्ञों को उनकी योग्यता और अनुभव के अनुरूप अवसर देने, एलटी शिक्षकों के TET संबंधी मामले में सेवा नियमावली एवं न्यायिक स्थिति का सम्यक परीक्षण करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सेवा नियमावली में संशोधन कर पदोन्नति में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की गई है।
थपलियाल ने कहा कि उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल प्रशासनिक पुनर्गठन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अकादमिक विशेषज्ञता, संस्थागत निरंतरता और स्पष्ट कैडर व्यवस्था जरूरी है। SCF-TE के अनुरूप सुविचारित एकल शिक्षक शिक्षा ढांचा तैयार होने से राज्य में शिक्षक प्रशिक्षण, शोध, नवाचार और अकादमिक मार्गदर्शन की व्यवस्था को दीर्घकालीन मजबूती मिल सकती है।






