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हल्द्वानी में खुली उत्तराखण्ड की पहली GI उत्पाद गैलरी

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posted on : जुलाई 17, 2026 12:46 पूर्वाह्न

हल्द्वानी : उत्तराखण्ड में भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त उत्पादों को एक ही स्थान पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से राज्य की पहली जीआई उत्पाद गैलरी हल्द्वानी स्थित उत्तराखण्ड फॉरेस्ट ट्रेनिंग अकादमी में शुरू की गई है। 13 जुलाई को उद्घाटित इस गैलरी में राज्य के 30 से अधिक जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प, पारंपरिक खाद्य पदार्थ और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं।

करीब तीन महीने में तैयार की गई यह गैलरी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्रशिक्षणार्थियों और आम आगंतुकों के लिए खोली गई है। इसका उद्देश्य उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट उत्पादों और उनकी स्थानीय पहचान से लोगों को परिचित कराना, साथ ही किसानों, कारीगरों और शिल्पकारों को व्यापक बाजार से जोड़ने में मदद करना है।

 

गैलरी में क्या-क्या है खास

गैलरी में तेजपात, मुनस्यारी का सफेद राजमा, कुमाऊं का च्यूरा तेल, अल्मोड़ा की लाखोरी मिर्च, बेरीनाग चाय, काला भट्ट, बेडू, रामनगर की लीची और रामगढ़ का आड़ू जैसे प्रमुख कृषि एवं खाद्य उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं।

वहीं हस्तशिल्प खंड में ऐपन कला, चमोली के राममाण (रम्माण) मुखौटे, पारंपरिक तमटा कॉपरवेयर (ताम्र शिल्प), रिंगाल शिल्प, नैनीताल की मोमबत्तियां और बुरांश का शरबत भी आकर्षण का केंद्र हैं।

लीची और आड़ू जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए विशेष संरक्षण तकनीक का उपयोग किया गया है, ताकि आगंतुक किसी भी मौसम में इन्हें देख सकें।

 

क्या होता है जीआई टैग

भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) ऐसा चिन्ह है, जो उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषता किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। भारत में जीआई पंजीकरण भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत किया जाता है। यह टैग उत्पाद की मौलिक पहचान को कानूनी संरक्षण देता है और उसके नाम के अनधिकृत या नकली उपयोग पर रोक लगाने में मदद करता है।

 

उत्तराखण्ड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल

उत्तराखण्ड के कई पारंपरिक उत्पाद सीमित क्षेत्रों में ही तैयार होते हैं, जिसके कारण उनकी जानकारी आम बाजार तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में एक ही स्थान पर इन सभी उत्पादों की प्रदर्शनी से राज्य की कृषि, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी।

वर्तमान में उत्तराखण्ड के 30 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। दिसंबर 2023 में राज्य को एक ही दिन में 18 नए जीआई टैग प्राप्त हुए थे, जिससे उत्तराखण्ड एक साथ सर्वाधिक जीआई पंजीकरण हासिल करने वाले राज्यों में शामिल हो गया।

अधिकारियों का मानना है कि यह गैलरी राज्य के जीआई उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थानीय किसानों, कारीगरों और शिल्पकारों की आजीविका को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हालांकि, गैलरी में उत्पादों की प्रत्यक्ष बिक्री होगी या नहीं, इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

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सेमन्या कण्वघाटी हिन्दी पाक्षिक समाचार पत्र – www.liveskgnews.com

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