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केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में देश की पहली “Land Border District SPs Conference-2026” नई दिल्ली में आयोजित, डीजीपी दीपम सेठ सहित उत्तराखण्ड के पांचों अन्तरराष्ट्रीय सीमावर्ती जनपदों के पुलिस अधीक्षकों ने किया प्रतिभाग

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posted on : जुलाई 10, 2026 4:19 अपराह्न

नई दिल्ली : केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 09 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में देश की पहली ‘Land Border District SPs Conference-2026’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के 18 सीमावर्ती राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों एवं अन्य केन्द्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख, सीमा सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी तथा सीमावर्ती जनपदों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।

सम्मेलन में आयोजित विभिन्न विशेष सत्रों के दौरान गृह मंत्री ने सीमा-पार आतंकवाद एवं संगठित अपराध, सीमा सुरक्षा, वित्तीय अपराध एवं अवैध धन प्रवाह, सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन तथा सीमा विकास में सामुदायिक सहभागिता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

उत्तराखण्ड राज्य से पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ एवं नेपाल एवं तिब्बत (चीन) की अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े राज्य के पांच सीमावर्ती जनपद – ऊधमसिंहनगर, पिथौरागढ़, चम्पावत, उत्तरकाशी एवं चमोली – के पुलिस अधीक्षकों ने सम्मेलन में सहभागिता की। गृह सचिव उत्तराखंड शासन शैलेश बगोली, महानिदेशक अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन प्रतिभाग किया गया।

दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े राज्य होने के कारण उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं सामरिक परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सम्मेलन में उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा आधुनिक तकनीक आधारित सीमा निगरानी, सीमा-पार अपराधों की रोकथाम, स्थानीय खुफिया तंत्र को सुदृढ़ बनाने, सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से संबंधित सुझाव साझा किए गए।

सम्मेलन के ‘Community Engagement for Border Development’ विषयक सत्र में पुलिस अधीक्षक, चम्पावत रेखा यादव ने उत्तराखण्ड पुलिस की जन-केंद्रित एवं सहभागितापूर्ण पुलिसिंग मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने हेतु स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता पर आधारित ‘Five Pillars of Community Force Multiplication’ – विश्वास, सूचना, सहभागिता, क्षमता निर्माण तथा प्रोत्साहन एवं संरक्षण – की अवधारणा को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। इस दौरान सीमांत क्षेत्रों में नियमित रूप से आयोजित ‘रात्रि चौपाल’ पहल के सकारात्मक परिणामों को साझा किया गया तथा पिथौरागढ़ जनपद के सीमांत क्षेत्र में विकसित ‘गुंजी मॉडल’ को रिवर्स माइग्रेशन के सफल उदाहरण के रूप में प्रदर्शित किया गया।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा – केन्द्र सरकार समग्र सीमा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की अवधारणा के तहत सीमा सुरक्षा बलों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अन्य संबंधित एजेंसियों तथा स्थानीय नागरिकों के समन्वय से एक मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण तथा देश को घुसपैठ से मुक्त बनाने के लिए सुदृढ़ व्यवस्था तैयार की जा रही है। प्रधानमंत्री जी के ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के अंतर्गत सीमांत गांवों में पलायन रोकने, रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सीमांत क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव से संबंधित सूचनाओं को समय पर उच्च स्तर तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रॉक्सी वार, कट्टरपंथ, ड्रोन, साइबर एवं संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटते हुए सीमाओं को सुरक्षित एवं समृद्ध बनाना हमारी प्राथमिकता है।

पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड दीपम सेठ ने कहा कि यह सम्मेलन सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, समन्वित एवं जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में साझा किए गए अनुभव, नवाचार एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास तथा नागरिक सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने में उपयोगी सिद्ध होंगी।

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