देहरादून। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को राहत देने के लिए गृह मंत्रालय ने नई व्यवस्था लागू की है। अब साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों को होल्ड (फ्रीज) की गई धनराशि वापस पाने के लिए पुलिस थानों, बैंकों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पीड़ित घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर अपनी रकम वापस प्राप्त कर सकेंगे।
गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से पात्र पीड़ित स्वयं ऑनलाइन रिफंड का दावा कर सकेंगे।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि यह सुविधा केवल उन मामलों में उपलब्ध होगी, जिनमें पीड़ित ने समय रहते 1930 हेल्पलाइन या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई हो और ठगी की रकम अपराधियों के बैंक खातों में फ्रीज कर दी गई हो। यदि ठगी की राशि पहले ही खातों से निकाली जा चुकी है, तो इस व्यवस्था के तहत रिफंड संभव नहीं होगा।
नई व्यवस्था के अनुसार 50 हजार रुपये तक की होल्ड राशि वाले मामलों में एफआईआर या न्यायालय के आदेश की आवश्यकता नहीं होगी। पुलिस रिपोर्ट और इंडेमनिटी बॉन्ड के आधार पर धनराशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में वापस भेजी जाएगी। वहीं, यदि किसी एक बैंक खाते में 50 हजार रुपये से अधिक राशि होल्ड है, तो एफआईआर दर्ज होना अनिवार्य होगा।
पोर्टल पर आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित पुलिस इकाई द्वारा कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और आवश्यक नोटिस अपलोड किए जाएंगे। इसके बाद संबंधित बैंक सीधे पीड़ित के खाते में धनराशि स्थानांतरित करेगा।
ऐसे करें आवेदन
- एमआरएम पोर्टल पर लॉगिन करें।
- एनसीआरपी शिकायत में दर्ज मोबाइल नंबर से ओटीपी के माध्यम से सत्यापन करें।
- 14 अंकों की शिकायत आईडी दर्ज कर रिफंड अनुरोध भेजें।
- पैन कार्ड, बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड अपलोड करें।
- घोषणा पत्र स्वीकार कर आवेदन जमा करें।
आवेदन के बाद प्राप्त यूनिक रिक्वेस्ट आईडी से रिफंड की स्थिति ट्रैक की जा सकेगी।
नई व्यवस्था से साइबर ठगी के हजारों पीड़ितों को त्वरित राहत मिलने की उम्मीद है और धनवापसी की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी होगी।



