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जमानत मामलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तुरंत आदेश और रिहाई के दिए निर्देश

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posted on : मई 29, 2026 5:57 अपराह्न

नई दिल्ली। Supreme Court of India ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों, खासकर जमानत याचिकाओं में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए देशभर की अदालतों के लिए अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस Justice Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की पीठ ने कहा कि जमानत अर्जियों पर आदेश उसी दिन सुनाए जाने चाहिए। यदि किसी आदेश को सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अगले दिन तक सुनाकर वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत या सजा निलंबन का आदेश पारित होते ही जेल प्रशासन को तत्काल सूचित किया जाए, ताकि विचाराधीन कैदी या दोषी की रिहाई उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनिश्चित की जा सके।

संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अदालत ने कहा कि यदि किसी फैसले का केवल ऑपरेटिव हिस्सा सुनाया जाता है, तो उसका विस्तृत और कारणयुक्त आदेश 15 दिनों के भीतर अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी फैसले को सुरक्षित रखने के चार महीने के भीतर सुनाया नहीं जाता है, तो संबंधित पक्ष हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से संपर्क कर सकता है। ऐसी स्थिति में मामले को दूसरी बेंच को सौंपने पर विचार किया जा सकेगा।

पीठ ने आगे कहा कि जब किसी फैसले का पूरा और कारणयुक्त आदेश खुली अदालत में सुनाया जाता है, तो उसे 24 घंटे के भीतर वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इन निर्देशों का उद्देश्य किसी विशेष जज या हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित करना

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