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168वें बलिदान दिवस पर बाबू वीर कुंवर सिंह को देशभर में श्रद्धांजलि

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posted on : अप्रैल 27, 2026 12:11 पूर्वाह्न
  • प्रशांत सी. बाजपेयी

1857 की क्रांति के महानायक और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह के 168वें बलिदान दिवस पर उन्हें देशभर में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बिहार के जगदीशपुर रियासत से ताल्लुक रखने वाले बाबू कुंवर सिंह का जन्म 13 नवंबर 1777 को हुआ था, जबकि उन्होंने 26 अप्रैल 1858 को मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वे सबसे उम्रदराज और साहसी सेनानायकों में से एक माने जाते हैं। उस समय दानापुर, बैरकपुर और अन्य क्षेत्रों में विद्रोह की चिंगारी भड़कने के बाद उन्होंने भारतीय सैनिकों और जनसमूह का नेतृत्व किया।

इतिहास के अनुसार, उन्होंने 80 वर्ष की आयु में भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अदम्य साहस का परिचय दिया। 25 जुलाई 1857 को दानापुर के सैनिकों के साथ मिलकर आरा पर कब्जा किया और ब्रिटिश सेना को करारी शिकस्त दी।लंबे गुरिल्ला युद्ध के दौरान उन्होंने आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर तक अंग्रेजों को चुनौती दी। घायल होने के बावजूद उन्होंने लड़ाई जारी रखी और जगदीशपुर किले को पुनः अपने नियंत्रण में लिया।

बताया जाता है कि गंगा पार करते समय वे घायल हुए और अंतिम समय तक संघर्ष करते रहे। 26 अप्रैल 1858 को उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनका साहस, नेतृत्व और मातृभूमि के प्रति समर्पण भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। आज भी उनका बलिदान स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरणास्रोत के रूप में याद किया जाता है।

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