करीब 30 वर्षीय युवती चारे काटने वाली मशीन के हादसे में अपने चेहरे का बड़ा हिस्सा खो बैठी थी। दुर्घटना में उसके चेहरे के दाहिने हिस्से की हड्डी, आंख, गाल, ऊपरी होंठ और नाक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। इस हादसे का असर न केवल उसके शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ा, बल्कि वह मानसिक रूप से भी टूट गई और सामाजिक रूप से अलग-थलग हो गई थी।
पीजीआई के ओरल हेल्थ साइंसेज सेंटर की टीम ने पंजाब यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस चुनौतीपूर्ण मामले में हाइब्रिड तकनीक अपनाई। उपचार के दौरान सबसे पहले युवती के चेहरे की 3डी स्कैनिंग कर सटीक डिजिटल मॉडल तैयार किया गया। इसके बाद कंप्यूटर एडेड डिजाइन (सीएडी) की मदद से चेहरे के स्वस्थ हिस्से के आधार पर क्षतिग्रस्त हिस्से का डिजाइन बनाया गया।
अगले चरण में 3डी प्रिंटिंग तकनीक से हल्का और अनुकूल ढांचा तैयार किया गया, ताकि कृत्रिम अंग आरामदायक हो। अंतिम चरण में मेडिकल ग्रेड सिलिकॉन का उपयोग कर पारंपरिक तकनीक के जरिए कृत्रिम चेहरा तैयार किया गया, जिससे उसका स्वरूप काफी हद तक प्राकृतिक दिखाई देता है।
इस सफल उपचार के बाद युवती के आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार आया है और अब वह सामान्य जीवन जीने के साथ समाज में सहज रूप से शामिल हो पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक और पारंपरिक कारीगरी के इस संयोजन से भविष्य में ऐसे जटिल मामलों के उपचार में नई संभावनाएं खुलेंगी।





