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हिमालयी राज्यों में हर साल औसतन 132 हिमस्खलन की घटनाएं, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड सबसे ज्यादा प्रभावित

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posted on : जनवरी 21, 2026 1:54 अपराह्न

देहरादून/श्रीनगर: देश के हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन (एवलांच) एक गंभीर प्राकृतिक खतरा बने हुए हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इन राज्यों में हर वर्ष औसतन 132 हिमस्खलन की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं। इनमें से सबसे अधिक प्रभावित राज्य जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड हैं, जहां भौगोलिक स्थिति, भारी बर्फबारी और जलवायु परिवर्तन के कारण यह जोखिम लगातार बढ़ रहा है।

2020-21 से 2024-25 तक के पांच वर्षों के दौरान कुल 661 हिमस्खलन की घटनाएं रिपोर्ट हुईं, जिनमें जम्मू-कश्मीर में अकेले 500 से अधिक मामले सामने आए। उत्तराखंड भी इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जहां पहाड़ी इलाकों में सड़कें, गांव और पर्यटन स्थल बार-बार प्रभावित होते हैं। हिमाचल प्रदेश और अन्य हिमालयी क्षेत्रों में भी यह समस्या मौजूद है, लेकिन जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में संख्या और प्रभाव सबसे ज्यादा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी हिमालय में 1,100 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को ‘एवलांच साइट्स’ के रूप में चिह्नित किया गया है, जहां भारी बर्फबारी, तेज हवाएं और ढलान की वजह से हिमस्खलन का खतरा रहता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव आ रहा है, जिससे ऐसे हादसों की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है। पिछले दशकों में हिमस्खलन से सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, और सड़कें कई महीनों तक बंद रहती हैं।

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