posted on : फ़रवरी 24, 2023 8:45 अपराह्न
रिखणीखाल । आंगनबाडी सहायिका ने अपनी पुत्री का जन्मोत्सव विद्यालय में बच्चों संग धूमधाम से मनाया। रिखणीखाल प्रखंड की बहुचर्चित आंगनबाडी सहायिका बीरा देवी ने अपनी बच्ची हिमानी का 14 वां जन्मोत्सव राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सिलगांव के बालक बालिकाओं संग शुक्रवार को धूमधाम से मनाया। यों तो हिमानी हर साल अपना जन्मदिन अपने घर में परिवार संग मनाती आई है, लेकिन उसने इस बार अपना जन्मदिन अपने विद्यालय के छात्र छात्राओं के साथ मनाने की जिद अपनी माँ से की। माँ भी उसकी बात को टाल न सकी।उसकी माँ भी इसी विद्यालय परिसर में आंगनबाडी सहायिका बतौर कार्यरत है। उनकी पुत्री कक्षा 8 की छात्रा है और इस विद्यालय में मेरी पढ़ाई का आखिरी साल है ।
लो जी फिर क्या था, उसकी माँ ने केक कहीं दूर किसी कस्बे से मंगाया और विद्यालय में प्रथम वादन में ही केक काटा गया,सभी बच्चों ने केक चाव से खाया तथा भोजन का भी प्रबन्ध विद्यालय में था,उसका भी स्वाद चखा ।आंगनबाडी के नन्हें मुन्ने बच्चों ने अभी तक केक सिर्फ टीवी चैनल पर ही देखा था तो उन्होनें भी आज पहली बार केक का स्वाद चखा। ये विद्यालय में जन्मदिन मनाने का पहला अवसर था। सभी ने इस खुशी में खूब जश्न मनाया। इसके प्रेरणा उसी विद्यालय की शिक्षिका पूनम डबराल ने भी इस जश्न को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी तथा माहोल को खुशनुमा कर दिया ।
आंगनबाडी सहायिका बीरा देवी उन महिलाओं में से एक है जिन्होंने दो साल पहले महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास कार्यालय रिखणीखाल में प्रधान लिपिक प्रदीप पंवार के भ्रष्टाचार और घोटालों की परत खोली थी, उसमें बीरा देवी को कुछ हद तक कामयाबी भी मिली। अन्ततः उस कर्मचारी को 11 सालों से जमी जड़ों से स्थानांतरण होना पड़ा।बीरा देवी दबंग व शिक्षित महिला है। वह अपने अधीनस्थ आंगनबाडी बच्चों को अच्छी शिक्षा व संस्कार देने में प्रयासरत रहती है। शुक्रवार को विद्यालय में बच्चों व गुरुजनों में खुशी का वातावरण व माहौल साफ झलक रहा था। इस विद्यालय की शिक्षिका पूनम डबराल स्कूल में समय समय पर अनेक कार्यक्रम करवाती रहती है। स्थानीय अभिभावक उनके ऐसे शिक्षाप्रद कार्यों से प्रसन्न रहते हैं। विद्यालय में समुचित साधनों के अभाव में भी वे लगी रहती देखी गई है।जबकि यह विद्यालय बीहड़ क्षेत्र व गुफा, कन्दराओ व लोहेनुमा पत्थरों के बीच में स्थित है।विद्यालय भवन की हालत भी किसी से छिपी नहीं है। ये तो पहाड़ी क्षेत्रों में आम बात हो गई है। इसका दोष तो शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को जाता है।


